जिला कलेक्ट्रेट परिसर में देश विरोधी नारेबाजी और आपत्ति जताने पर वकीलों के साथ मारपीट से खलबली मच गई थी। वामपंथी संगठन के पदाधिकारियों ने कहा है कि यह हमला आरएसएस ने कराया है। महिलाओं को भी पीटा गया लेकिन वहां मौजूद पुलिसवाले तमाशा देखते रहे। इसके उलट, वकीलों ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने भारत विरोधी और पाकिस्तान के पक्ष में नारेबाजी की। जिला अधिवक्ता संघ की ओर से राष्ट्र विरोधी गतिविधि करा देते हुए नारेबाजी और वकीलों से मारपीट के दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए एससएपी को पत्र भेजा है।
भाकपा (माले) न्यू डेमोक्रेसी के सचिव डॉ.आशीष मित्तल ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों पर काला कोट पहने आरएएस के गुंडों ने हमला किया। उन लोगों ने महिलाओं पर भी हाथ छोड़े और गालियां दीं। लाठी और लात-घूंसे से पिटाई में एलआईसी वर्कर्स यूनियन के अविनाश मिश्रा, पीयूसीएल इलाहाबाद की महासचिव उत्पला शुक्ला, हिंदी लेखिका नीलम शंकर, विशाल, जनवादी लेखक संघ से जुड़े केके पांडेय और आईसा कार्यकर्ता जख्मी हो गए। धरना प्रदर्शन में स्टू़डेंट्स इस्लामिक आर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया, नेशनल असेम्बली ऑफ मुस्लिम स्टूडेंट्स एंड यूथ के भी लोग शामिल रहे।
एसएसपी कार्यालय से कुछ दूरी पर इस हमले के बाद कई पुलिस अफसर आए मगर वे भी बोल रहे थे कि अच्छा हुआ। इससे इतर, जिला अधिवक्ता संघ के मंत्री राजेंद्र प्रसाद मिश्र रज्जू ने कहा है कि अधिवक्ता अपने विधिक काम में जुटे थे तभी 50-60 प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में भारत के खिलाफ और पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने लगे। अधिवक्ताओं ने विरोध किया तो प्रदर्शनकारियों ने हमला बोल दिया। कई अधिवक्ता घायल हो गए। अधिवक्ताओं ने ही किसी तरह झगड़ा शांत कराया। इस मसले पर दोपहर बाद जिला अधिवक्ता संघ की एक बैठक में घटना की निंदा करते हुए एसएसपी को पत्र लिख दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
‘घटना की जांच की जा रही है। मारपीट में घायल हुए लोगों की तरफ से थाने में दी गई तहरीर के आधार पर मुकदमा लिखकर तफ्तीश की जाएगी। नारेबाजी का अभी कोई सुबूत नहीं मिला है। प्रामाणिक साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।’
0राजेश यादव, एसपी सिटी