इलाहाबाद (ब्यूरो) मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को सड़वा में आयोजित समारोह में अपनी बात खत्म करने के बाद दोबारा लौटकर जिस तरह इलाहाबाद में लंदन ब्रिज और सिडनी के हार्बर ब्रिज जैसा विश्वस्तरीय पुल बनाने की घोषणा की, उससे भले ही फौरी तौर पर खुश हुआ जा सकता है। गंगा पर झूंसी-अरैल के बीच 987 करोड़ रुपये में प्रस्तावित इस पुल के निर्माण का जिम्मा जल निगम की इकाई कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) को सौंपा गया है लेकिन इसकी शुरुआत और योजना की अवधि के बारे में फिलहाल कोई घोषणा नहीं की गई है।
दरअसल सरकारी कार्यशैली के बीते अनुभवों और गंगा पर ही बने झूंसी पुल की परेशानियों को लेकर सामने खड़ी दिक्कतें पहले ही सवाल खड़े करती हैं। दो दशक बाद ही इसमें खराबियों का सिलसिला शुरू हो गया। जिन विश्वस्तरीय पुलों के निर्माण की बात की जा रही है, वैसी तकनीक और पुलों की लंबी उम्र का मुद्दा भी सबसे अहम है। ऐसी योजनाओं की घोषणा के पहले सुविचारित नीति जरूरी है, ताकि भरोसा किया जा सके लेकिन प्रस्तावित पुल फिलहाल अभी कागजों तक ही सीमित है।
वर्ष 1977 में निर्माण के बाद बीते डेढ़ दशक में झूंसी पुल 11 बार खराब हो चुका है। हालांकि पुल के पिलर्स में आयी खराबी को हर बार ठीक कर लिया गया। शहर को वाराणसी, जौनपुर व गोरखपुर समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण पुल के पिलरों में बार बार आ रही खराबी वर्ष 2007 में पुल में आयी खराबी से एक सप्ताह तक यातायात बाधित रहा। इसे ठीक कराने में निजी कंपनी को करोड़ों का भुगतना भी करना पड़ा है। पीडब्ल्यूडी के अफसर बार-बार पुल में गडबड़ी के लिए क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों के गुजरने को कारण बता रहे हैं।
इस महत्वपूर्ण पुल पर पूरे साल अंधेरा पसरा रहता है। पुल पर स्ट्रीट लाइटें तो लगी है लेकिन इसे जलाने व मरम्मत की जिम्मेदारी कौन संभाले? इसे लेकर पीडब्ल्यूडी व नगर निगम के बीच विवाद है। महाकुंभ, अर्धकुंभ मेले में जिला प्रशासन के हस्तक्षेप पर लाइट्स जला दी जाती हैं लेकिन मेला खत्म होते ही फिर बुझ जाती हैं। पुल पर लाइट न होने से आए दिन दुर्घटनाएं होती है। हादसों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
तकरीबन 15 हजार करोड़ की लागत से तैयार होने वाले 302 किलोमीटर लंबे लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे को 2016 में पूरा करने का लक्ष्य है। इसके लिए पांच हजार करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण पर खर्च किए गए। दावा है कि इसके बन जाने के बाद लखनऊ से आगरा महज तीन घंटे में पहुंचा जा सकेगा।
आस्ट्रेलिया के प्रमुख शहर सिडनी में इस आलीशान पुल की आधारशिला1923 में पड़ी और 19 मार्च1932 से इस पर यातायात शुरू हुआ। 1149 मीटर लंबे और 49 मीटर चौड़ा यह पुल विश्व में सबसे ऊंचा (134 मीटर ऊंचाई) पुल माना गया है। इस पर आठ रोड लेन, दो रेल ट्रैक, एक पैदल यात्रियों के लिए मार्ग और एक साइकिल लेन है। पुल इस कदर विख्यात है कि दुनिया भर से रोज हजारों लोग उसे देखने और हेलीकॉप्टर से नजारा लेने आते हैं। पुल के आसपास स्पीड बोट, फेरी, स्टीमर के जरिए भी लोग पिकनिक का आनंद लेते हैं।
लंदन में टेम्स नदी पर बना लंदन ब्रिज भी दुनिया में अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर है। यह लंदन आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। पहली बार यह पुल वर्ष 1176 में बना और वर्ष 1832 तक चला। वर्ष 1832 में यह दूसरी बार जबकि आधुनिक रूप के साथ तीसरी बार यह वर्ष 1971 में बनकर तैयार हुआ। 17 मार्च 1973 को क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने इसका लोकार्पण किया। 269 मीटर लंबा यह पुल 32 मीटर चौड़ा है। इस विख्यात पुल पर ही नर्सरी के बच्चों के लिए एक पोएम-‘लंदन ब्रिज इज फालिंग’दुनिया भर के स्कूलों में पढ़ाई जाती है।