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दूर की जाएंगी शनिदेव संबंधी भ्रांतियां

Thu, 25 Feb 2016 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने कुछ दिनों पहले शनिदेव के लिए कहा था कि शनि क्रूर ग्रह हैं, उनका पूजन नहीं करना चाहिए, घर में उनकी प्रतिमा स्थापित करने से अमंगल होगा। शंकराचार्य के इस बयान के बाद काफी विवाद हुआ और भ्रांतियां भी फैल गईं।
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अब शनि को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने का बीड़ा शनि परिवार सेवा समिति ने उठाया है। अतरसुइया स्थित शनिधाम में शुक्रवार से शुरू होने जा रहे चार दिवसीय शनि महोत्सव के दौरान भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। इसी के तहत साढ़े सात किलोमीटर लंबी शनि शांति शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें शनि से संबंधित झांकियां शामिल होंगी। नृत्यनाटिका के माध्यम से भी जन-जन तक सच्चाई पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

शुक्रवार को मुकुट पूजा से शनि महोत्सव की शुरुआत होगी। शनिवार को शनि देव की प्रतिमा गाजे-बाजे के साथ महावीरन गली सत्ती चौरा स्थित हनुमान मंदिर होते हुए शनि मंदिर लाई जाएगी। षोडसोपचार पूजन, स्थापना के बाद निशान चढ़ाए जाएंगे। शनि पीठाधीश्वर पराग महाराज के अनुसार शनि न्याय के देवता हैं और बड़ी कठोरता से न्याय करते हैं। उनकी दृष्टि से बचना नामुमकिन है।
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सच्चाई की राह पर चलने वालों को शनि से कोई भय नहीं है। सूर्य पुत्र शनि के पूजन से बड़ी से बड़ी बाधाओं का निवारण होता है। उन्होंने बताया कि साढ़े सात किलोमीटर लंबी श्री शनि शांति यात्रा में काले कपड़े पहनकर शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को शनि कृपा प्राप्त होगी। राहू-केतु जनित कष्ट दूर होंगे। यात्रा कल्याणीदेवी, बलुआघाट, तिलकरोड, चमेलीबाई धर्मशाला, घंटाघर, कोतवाली, रानीमंडी होते हुए शनिधाम पर समाप्त होगी। वहीं 29 फरवरी सोमवार को शनि देव प्रतिमा विसर्जन यात्रा पूरी सज धज के साथ निकलेगी। प्रतिमा को बलुआघाट ले जाकर परंपरा के मुताबिक भाई शनि देव का मिलन बहन यमुना माता से कराने के बाद रामघाट स्थित तालाब में विसर्जित किया जाएगा।
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