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फिगर के फेर में बीमारियां मुफ्त में मोल

Fri, 19 Feb 2016 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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 सुंदर काया और कम उम्र दिखने की चाहत लोगों को बेदम कर रही है। पर्याप्त मात्रा में शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व नहीं मिलने से खून की कमी के अलावा लोग एनोरेक्सिया, ईटिंग डिस ऑर्डर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। सुंदर दिखने के इस शगल की वजह से सिर्फ युवा और महिलाएं ही नहीं हैं, चालीस वर्ष से अधिक उम्र के प्रौढ़ भी इन बीमारियों को दावत दे रहे हैं। विशेषज्ञाें का कहना है कि नपुंसकता के पीछे किशोरावस्था में अधिक डायटिंग भी एक वजह है। वजन घटाने वाले प्रचार की बढ़ रही मांग से आने वाले दिनों में ऐसे खतरे और बढ़ सकते हैं। इसीलिए अब विशेषज्ञ ‘वेट लॉस नहीं हेल्दी वेट लॉस’ पर जोर दे रहे हैं।
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मम्फोर्डगंज के अंजनी माथुर एक निजी कंपनी में काम करते हैं। स्मार्ट दिखने के लिए उन्होंने जिम जाने और दवाइयों के इस्तेमाल के अलावा डायटिंग भी की लेकिन डॉक्टर की सलाह नहीं ली। अब वह हड्डियों में दर्द और पेट के रोगों से परेशान हैं। डॉक्टर ने पूरी तरह से आराम की सलाह दी है। उनके मित्र  प्रीतेश भी ऐसी ही समस्या से पीड़ित हैं। अधिक डायटिंग की वजह से इस तरह सेहत गंवाने वालों की फेहरिस्त लंबी है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के फूड टेकभनोलॉजी विभाग की डॉ.नीतू मिश्रा कहती हैं, हर उम्र और लंबाई के लिए वजन निर्धारित है। शरीर की बनावट भी उसी के अनुरूप होती है। उससे कम वजन बीमारी का लक्षण है। इसी के मद्देनजर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने दैनिक आहार का चार्ट जारी किया है जिसमें स्वस्थ शरीर के लिए पोषक तत्वों के अनुपात का पूरा विवरण है। यह उम्र, लंबाई, फिजिकल ऐक्टिविटी के साथ रहन-सहन पर भी निर्भर करता है। इन्हीं आधार पर काउंसिल ने भी बेसल मेटाबोलिक रेट (बीएमआर) जारी किया है। स्लिम बॉडी के लिए अधिक डायटिंग से मधुमेह, अस्थमा जैसी बीमारियाें का भी खतरा बढ़ जाता है। किसी काम में मस्तिष्क एकाग्र नहीं हो पाता। सुंदर और स्लिम दिखने की चाहत में कई बार लोग डिप्रेशन में भी चले जाते हैं।
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रोजाना के भोजन में निश्चित अनुपात में पोषक तत्व नहीं मिलते तो कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। युवाओं में जीरो कैलोरी मेंटेन करने का चलन बढ़ा है। चाय तक बिना चीनी के पीते हैं। ऐसे में शरीर के लिए ऊर्जा का काम करने वाला जरूरी कार्बोहाइड्रेड भी नहीं मिल पाता। इसके अलावा एक बड़ा वर्ग डॉक्टरी सलाह के बगैर बाजार में उपलब्ध डायटिंग पैकेज का इस्तेमाल कर रहा है। इसके भी नकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं। इन वजहों से एनोरिक्सिया नामक बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ी है।

कई बार तो लोग ईटिंग डिस ऑर्डर की स्थिति में पहुंच जाते हैं। इसमें खुद को पतला या मोटा होने से बचाने के लिए खाना तो खाते हैं लेकिन खुद प्रयास करके उल्टी करते हैं। यह काफी खतरनाक है। कम उम्र में अधिक डायटिंग से युवाओं में स्पर्म के निर्माण की समस्या भी आती है। बेहतर होगा यदि विशेषज्ञों की सलाह पर ही जिम तथा डायटिंग की जाए।

ज्यादा परहेज करने वाले शुगर और हार्ट के मरीजों को निर्धारित डाइट का ध्यान रखना अधिक जरूरी है। शुगर के मरीज मीठी वस्तुएं, आलू आदि का सेवन बिल्कुल छोड़ देते हैं जबकि, ग्लूकोज शरीर के ऊर्जा का स्रोत है तो आलू में कई अन्य पोषक तत्व भी हैं। मीठी वस्तुओं से परहेज करने वाले लोगों को इन तत्वों का विकल्प भी ढूंढ़ना चाहिए। अन्यथा, इन पोषक तत्वों की कमी से दूसरी बीमारियों का खतरा होगा। यही सावधानी फैट का बिल्कुल इस्तेमाल न करने वाले हार्ट के मरीज तथा मोटे लोगों को भी करनी चाहिए।
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