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अब भूल जाइए बड़हल, करौंदा जैसे देसी फलों का स्वाद

Fri, 19 Feb 2016 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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 आपने बड़हल, करौंदा, जामुन जैसे फलों को तो खाया होगा। खाने में इन फलों की चटनी का भी स्वाद लिया होगा, लेकिन अब इसे भूल जाइए। आने वाले दिनों में ये फल आपको देखने को शायद ही मिलें। फलों की इन प्रजातियाें पर संकट खड़ा हो गया है। ये प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। वन विभाग की ओर से ऐसे प्रजातियों पर खतरे की घंटी बजाने के बाद उसके संरक्षण एवं संवर्धन करने पर जोर दिया जा रहा है। लोगों को इन फलों के पौधे वितरित किए जा रहे हैं, जिससे कि वे इसका रोपण कर इसकी मौजूदगी को बनाए रखें।
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वन विभाग ने जिन फलों के विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है, उसमें बड़हल, बेल, अमरख, लसोढ़ा, करौंदा, खिरानी, जंगल जलेबी, सीताफल/ शरीफा, गुलाब जामुन, जामुन, आमरा, बेर, कुसुम आदि शामिल हैं। ये फल यूपी के साथ उत्तराखंड, बिहार सहित देश के दूसरे प्रदेशों में भी पाए जाते हैं। यूपी में इन फलों के पेड़ लगातार गिरते जा रहे हैं या फिर कटते जा रहे हैं। नए पौधे लगाए भी नहीं जा रहे हैं। नए पौधे लगाए जा रहे हैं तो वे पनप नहीं पा रहे हैं। इसके चलते इन पर संकट खड़ा हो गया है। लोगों में इन फलों के पेड़, पौधों को बचाने के लिए उत्सुकता न के बराबर है। इन फलों के प्रति लोगों में घटती संवेदना को देखते हुए वन विभाग ने इसे विलुप्ति होने की श्रेणी में डाल दिया है।

 मम्फोर्डगंज स्थित सामाजिक वानिकी एवं पारि-पुनर्स्थापना केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. अनीता तोमर और डॉ. अनुभा श्रीवास्तव कहती हैं कि वन विभाग की ऐसी रिपोर्ट के बाद से ही केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने इसके संरक्षण पर काम शुरू कर दिया है। इसके लिए संस्थान की ओर से लगातार शिविर लगाए जा रहे हैं। अब तक कुल 20 शिविर लगाए जा चुके हैं। शिविर में आने वाले लोगों को चार हजार पौधे भी बांटे गए। इसका असर कितना है यह कहना मुश्किल है, लेकिन इनके विलुप्ति के कगार पर आने से देशी फल लोगों से लगातार दूर होते जा रहे हैं।
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