मच्छरों के आतंक से परेशान शहरियों के लिए राहत भरी खबर है। वह दिन दूर नहीं जब एक बूटी आपको मच्छरों से निजात दिलाएगी। मच्छरों पर काबू पाने में मैट और क्वायल जो काम नहीं कर सके, वह मलेरिया बूटी करेगी।
मलेरिया बूटी यानी आर्टीमीशिया नाम का पौधा जिसकी पत्तियां और बीज मच्छरों को भगाने में कारगर पाए गए हैं। बंगलुरू, तमिलनाडु, केरल के कई हिस्सों में प्रयोग के बाद अब प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मलेरिया बूटी का उत्पादन शुरू हो गया है।
नाबार्ड ने किसान क्लबों के माध्यम से इलाहाबाद और आसपास के कई जिलों में मलेरिया बूटी (वैज्ञानिक नाम-आर्टीमीशिया) का उत्पादन शुरू किया है। मलेरिया बूटी उगाने के लिए किसानों को उन स्थानों पर ले जाकर प्रशिक्षण दिया गया है, जहां मलेरिया बूटी बड़े पैमाने पर उगाई जा रही है।
सैदाबाद, हंडिया, सोरांव के 20 किसानों ने ट्रेनिंग लेकर मलेरिया बूटी का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। नाबार्ड और खेती विशेषज्ञों का दावा है कि मलेरिया बूटी की पत्तियां और बीज मच्छरों से लड़ने में कारगर हैं।
गर्मी के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बड़ी समस्या है। नेशनल वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीबीपीसीपी) की ओर से किए गए सर्वे के मुताबिक जिले में हर साल बड़ी संख्या में लोग मलेरिया की चपेट में आते हैं और बीमारों में से लगभग दस फीसदी की मौत हो जाती है। मलेरिया से बचाव को कई कार्यक्रम चल रहे हैं लेकिन मच्छरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। मलेरिया बूटी ने जानकारों में नई उम्मीद जगाई है।
संस्था प्रगतिशील ग्रामोद्योग से जुड़े डॉ. विनय प्रकाश यादव ने बताया कि मलेरिया बूटी के नतीजे देखने और प्रशिक्षण के बाद इलाहाबाद और आसपास के जिलों में इसका उत्पादन शुरू किया गया है। पहले चरण में जिन 20 किसानों ने मलेरिया बूटी का उत्पादन किया, उसकी पत्तियों और बीजों की खरीद भी दवा कंपनी की तरफ से कर ली गई है। डॉ. यादव के मुताबिक आर्टीमीशिया की पत्तियों और बीज दोनों का उपयोग मच्छर भगाने की दवा के तौर पर किया जा रहा है।