2009 में बसपा का कपिलमुनि ने खोला था खाता
प्रयागराज की दूसरी सीट फूलपुर में भी पार्टी को सिर्फ एक बार जीत मिली है। 2009 में पार्टी उम्मीदवार कपिल मुनि करवरिया को जीत मिली थी। कांशीराम ने फूलपुर से भी 1996 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था। हालांकि उसमें भी जीत नहीं मिली थी। कांशीराम 146823 वोट पाकर भी सपा के जंग बहादुर पटेल से मात्र 16021 मतों के अंतर से हार गए। खास यह कि जंग बहादुर बसपा से ही सपा में गए थे और कांशीराम के काफी करीबी रहे।
इलाहाबाद सीट पर बसपा से जंगबहादुर पटेल, बेनी माधव बिंद, रामसेवक सिंह, राम पूजन पटेल, तुलसीराम यादव, केशरी देवी चुनाव लड़े लेकिन जीत नहीं मिली। 2004 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार रहीं केशरी देवी पटेल तथा 1991 में बेनी माधव बिंद दूसरे स्थान पर रहे।
शुरू से पार्टी के साथ जुड़े तथा कांशीराम के साथ काम कर चुके मंडल मुख्य कोऑर्डिनेटर बाबू लाल भंवरा का कहना है कि कई राज्यों के भ्रमण के बाद कांशीराम उत्तर प्रदेश में आए तो सबसे ज्यादा वक्त प्रयागराज में बिताया। फिर यहीं से चुनाव लड़े। हालांकि उन्हें जीत तो नहीं मिली लेकिन पार्टी का मजबूत जनाधार तैयार हुआ। उसी का नतीजा रहा कि 1993 के विधानसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन को जिले में नौ सीटें मिलीं थीं।
लोकसभा चुनावों में बसपा को मिले वोट
फुलपुर
चुनाव वर्ष उम्मीदवार पार्टी को मिले वोट स्थान
- 2019 -- -- --
- 2014 कपिल मुनि करवरिया 163710 तीसरा
- 2009 कपिल मुनि करवरिया 167542 विजेता
- 2004 केशरी देवी पटेल 201083 दूसरा
- 1999 तुलसीराम यादव 150173 तीसरा
- 1998 रामपूजन पटेल 177556 तीसरा
- 1996 कांशीराम 146823 दूसरा
- 1991 बेनी माधो बिंद 91039 दूसरा
- 1989 बेनी माधो बिंद 115521 तीसरा
पार्टी को मिलते रहे एक लाख से अधिक वोट
फूलपुर में बसपा को भले ही सिर्फ एक बार जीत मिली है लेकिन पार्टी का जनाधार लगातार बना हुआ है। सिर्फ 1991 के चुनाव में पार्टी को एक लाख से कम वोट मिले हैं। अन्यथा, हर चुनाव में एक लाख से अधिक वोट मिले। 2004 में तो केशरी देवी को दो लाख से अधिक वोट मिले थे। हालांकि, दूसरे स्थान पर रहीं। जबकि इनके बाद 2009 में एक लाख 67 हजार से अधिक वोट पाकर कपिल मुनि निर्वाचित हुए थे। रामपूजन पटेल, तुलसी राम यादव को भी डेढ़ लाख से अधिक वोट मिले थे। इसी तरह से इलाहाबाद सीट पर भी 1991 के चुनाव के बाद से पार्टी को किसी भी चुनाव में एक लाख से कम वोट नहीं मिले। केशरी देवी पटेल और अशोक बाजपेई को डेढ़ लाख से अधिक वोट मिले थे।