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गलियों में बने मकान भी हो गए व्यावसायिक

Tue, 23 Feb 2016 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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नगर निगम के कर्मचारियों ने सर्वे के नाम पर गलियों में बने काफी मकानों को व्यावसायिक श्रेणी में डाल दिया। पुरानी और घनी आबादी वाले इलाकों की संकरी गलियों में बने ऐसे मकानों के मालिकों को आवासीय गृहकर के मुकाबले पांच से छह गुना अधिक टैक्स का बिल मिला तो वे परेशान हो गए। अब वे बिल ठीक कराने के लिए विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
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निगम कर्मियों की मनमानी और लापरवाही का खामियाजा आम गृहस्वामियों को भुगतना पड़ रहा है। पुराने और घनी आबादी वाली इलाकों की संकरी गलियों में मकानों का के मूल्यांकन में इन कर्मियों ने जमकर मनमानी की। इन इलाकों में हमेशा से आवासीय टैक्स देने वाले मकानों का गृहकर पिछले वर्ष तक जहां हजार-दो हजार रुपये सालाना था, इस वित्तीय वर्ष में 10-12 हजार रुपये या उससे अधिक का बिल जारी कर दिया गया है। अब बिल ठीक कराने के लिए लोग नगर निगम के जोनल कार्यालय से लेकर मुख्यालय तक का चक्कर लगा रहे हैं। यहां कर्मचारी बिल कम कराने के नाम पर वसूली में लग गए हैं।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके मिश्र के मुताबिक गलियों में बने जिन मकानों में व्यावसायिक श्रेणी का बिल भेजा गया है, वह भवन के क्षेत्रफल की नाप कराके शिकायत दर्ज कराएं, उनका टैक्स ठीक किया जाएगा।
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