हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीमकोर्ट का निर्देश
हाईकोर्ट ने नजूल भूखंडों से बेदखली के खिलाफ खारिज कर दी हैं याचिकाएं
प्रयागराज। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर के सिविल लाइंस और अन्य मोहल्लों में स्थित नजूल भूखंडों को खाली कराने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीमकोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने (स्टेटस-को) का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के फैसले को प्रकृति राय और एंग्लो इंडियन एसोसिएशन सहित कई लोगों ने सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी दाखिल कर चुनौती दी है। जस्टिस आरएफ नॉरीमन और जस्टिस एस रवींद्र भट्ट की पीठ ने इस मामले में सभी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई के लिए चार फरवरी 2020 की तारीख नियत की है। इस दौरान विवादित प्लाटों पर यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया है।
एंग्लो इंडियन एसोसिएशन के अधिवक्ता रोहित स्थालकर के मुताबिक प्रयागराज स्थित कई नजूल भूखंडों की लीज डीएम प्रयागराज ने रद्द कर दी है या जहां लीज बढ़ाने की अर्जी दाखिल थी, वहां लीज बढ़ाई नहीं और जमीन को वापस राज्य सरकार के खाते में दर्ज कर दिया गया। इसमें क्लाइव रोड स्थित आनापुर कोठी बंगला नंबर-17 तथा हीरा हलवाई के पीछे स्थित एंग्लो इंडियन एसोसिएशन की जमीन तथा कई अन्य नजूल प्लाट शामिल हैं। इन सभी लीज रिन्यूवल अथवा कैंसिल करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज करते हुए जिला प्रशासन को तीस दिन के भीतर नजूल भूमि कब्जे से मुक्त कराने का आदेश दिया था। इस आदेश को एसएलपी में चुनौती दी गई थी जिस पर सुप्रीमकोर्ट ने यथास्थिति का आदेश दिया है।
गौरतलब है कि इन नजूल भूखंडों पर सैकड़ों परिवार वर्षों से रह रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने सभी को नोटिस जारी कर बंगले खाली करने का आदेश दिया था। सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद यहां के निवासियों को कुछ समय के लिए राहत मिल गई है।