सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में वर्षों से नियमित भर्ती के बजाय संविदा व्यवस्था के सहारे काम चलाए जाने पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि बिना वैधानिक ढांचे के संविदा कर्मचारियों को अनिश्चितकाल तक बनाए रखना उनके शोषण की आशंका बढ़ाता है और समानता के संवैधानिक अधिकार के विपरीत है। कोर्ट ने राज्य सरकार को नर्सिंग कॉलेजों में नियमित भर्ती के लिए प्रस्तावित नियमावली को जल्द मंजूरी देकर अधिसूचित करने का अंतरिम परमादेश जारी किया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में नियमित भर्ती किए बिना वर्षों से संविदा के आधार पर काम चलाने की व्यवस्था को गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने कहा कि बिना किसी वैधानिक ढांचे के संविदा कर्मचारियों को अनिश्चितकाल तक बनाए रखना उनके शोषण की संभावना को बढ़ाता है, जो न्याय व संविधान की भावना के खिलाफ है। इस प्रकार की तदर्थ और संविदा प्रथा समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन करती है।
बदायूं निवासी याची श्रीनिवासन की प्रिंसिपल-सह-प्रोफेसर के रूप में संविदा आधार पर नियुक्ति हुई थी। तीन जून 2025 के आदेश से उनकी नियुक्ति को इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि संविदा को तीन वर्ष से अधिक के लिए लिए नहीं बढ़ाया जा सकता है। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट के आदेश के अनुपालन में चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग के महानिदेशक की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया। कोर्ट ने पाया कि पूरे प्रदेश में 500 से अधिक पद संविदा के आधार पर भरे गए हैं। महज दो से तीन प्रतिशत पद ही नियमित हैं। इसके अलावा 25 प्रतिशत मेडिकल व नर्सिंग कॉलेजों का संचालन कार्यवाहक प्राचार्यों के भरोसे चल रहा है।
इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम परमादेश जारी कर कहा है कि नियमित चयनों के लिए प्रस्तावित ‘उत्तर प्रदेश नर्सिंग कॉलेज, शिक्षक, सेवा नियमावली, 2026’ के ड्राफ्ट को जल्द से जल्द मंजूरी दी जाए। साथ ही तत्काल अधिसूचित किया जाए ताकि जल्द से जल्द पारदर्शी एवं नियमित भर्तियां शुरू की जा सकें।
कोर्ट ने अगली सुनवाई 13 अक्तूबर 2026 तय करते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग से विस्तृत ब्योरा मांगा है। महानिदेशक को अगले हलफनामे में राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़े प्रोफेसरों के पदों का ब्योरा, विभागाध्यक्षों के रूप में काम कर रहे असिस्टेंट या एसोसिएट प्रोफेसरों की जानकारी, भर्ती के लिए भेजे गए अधियाचन और जारी विज्ञापनों की वर्तमान स्थिति पेश करने का आदेश दिया गया है।