इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीलीभीत के तत्कालीन एसडीएम से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कहा है कि राज्य सरकार की अर्जी पर याची के पक्ष में पारित डिक्री रद्द किए जाने के बाद मामले को मेरिट पर सुनने के बजाय पत्रावली दाखिल दफ्तर कैसे कर दी गई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीलीभीत के तत्कालीन एसडीएम से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कहा है कि राज्य सरकार की अर्जी पर याची के पक्ष में पारित डिक्री रद्द किए जाने के बाद मामले को मेरिट पर सुनने के बजाय पत्रावली दाखिल दफ्तर कैसे कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि यदि संबंधित एसडीएम का तबादला हो चुका हो तो आदेश उन्हें उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे स्पष्टीकरण सहित व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर सकें।
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यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने रानी देवी की याचिका पर दिया। याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि राज्य सरकार ने सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत अर्जी दाखिल की थी। अर्जी पर सुनवाई करते हुए एसडीएम ने याची के पक्ष में पारित डिक्री को निरस्त कर दिया। लेकिन, इसके बाद मामले की मेरिट पर आगे सुनवाई करने के बजाय पत्रावली दाखिल दफ्तर कर दी। डिक्री निरस्त होने के बाद मामले की नियमित सुनवाई होनी चाहिए थी, न कि पत्रावली बंद की जानी चाहिए थी।