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UP: जेनेरिक दवाओं की कीमत में अंतर और मुनाफाखोरी मामले में हाईकोर्ट सख्त, सरकार से चार सप्ताह में मांगा जवाब

Tue, 10 Jun 2025 12:42 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

याचिका में जेनेरिक दवाओं की कीमतों में भारी अंतर, मुनाफाखोरी, ब्रांडेड को प्राथमिकता देना और जेनेरिक दवाओं पर सरकारी प्रतीक चिह्न न होने जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता, उनकी मूल्य पारदर्शिता और सरकारी प्रतीक चिह्न को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका पर केंद्र-राज्य सरकार, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया सहित अन्य से चार सप्ताह में जानकारी मांगी है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह व संदीप जैन की खंडपीठ ने संजय सिंह की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका में जेनेरिक दवाओं की कीमतों में भारी अंतर, मुनाफाखोरी, ब्रांडेड को प्राथमिकता देना और जेनेरिक दवाओं पर सरकारी प्रतीक चिह्न न होने जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया गया है।

याचिका में कहा गया है कि भारत में जेनेरिक दवाओं को मूल्य नियंत्रण की सूची में रखे जाने के बावजूद कई मेडिकल स्टोर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उन्हें अधिकतम खुदरा मूल्य पर ही बेच रहे हैं। साथ ही मरीजों को यह पता नहीं चल पाता कि कौन सी दवा ब्रांडेड हैं और कौन सी जेनेरिक। याची ने मांग की है कि सभी जेनेरिक दवाओं पर एक अनिवार्य प्रतीक चिह्न लगाया जाए, ताकि आम लोग भ्रमित न हों। सरकारी सब्सिडी या मूल्य नियंत्रण का लाभ सीधे अंतिम उपभोक्ता को मिले।
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