यह था मामला
वाराणसी निवासी पिता जटा शंकर सिंह और पुत्र शिव प्रकाश सिंह दोनों अधिवक्ता हैं। आपसी विवाद की वजह से पिता ने वाराणसी के डीएम से प्रार्थना पत्र देकर अपने बेटे और बहू से अपना मकान खाली कराने की मांग की थी। डीएम ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 की धारा 21 के तहत बेटे और बहू दोनों को मकान खाली करने का आदेश दिया था। पुत्र और बहू ने डीएम के आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
मामले में याची के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय ने कहा कि पिता की संपत्ति में याची का हिस्सा है। इसको लेकर निचली अदालत में मुकदमा चल रहा है। अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता सौरभ श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि पिता वरिष्ठ नागरिक हैं। उन्हें माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के तहत संरक्षण प्राप्त है। कोर्ट ने मामले में पहले समझौते के आधार पर आपसी विवाद को सुलझाने की मोहलत दी, लेकिन जब मामला हल नहीं हुआ तो कोर्ट ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया।
डीएम ने पुत्र और बहू को दिया था मकान खाली करने का आदेश
वाराणसी निवासी पिता जटा शंकर सिंह और पुत्र शिव प्रकाश सिंह दोनों अधिवक्ता हैं। आपसी विवाद की वजह से पिता ने वाराणसी के डीएम से प्रार्थना पत्र देकर अपने बेटे और बहू से अपना मकान खाली कराने की मांग की थी। डीएम ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 की धारा 21 के तहत बेटे और बहू दोनों को मकान खाली करने का आदेश दिया था। पुत्र और बहू ने डीएम के आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले में याची के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय ने कहा कि पिता की संपत्ति में याची का हिस्सा है।
इसको लेकर निचली अदालत में मुकदमा चल रहा है। अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता सौरभ श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि पिता वरिष्ठ नागरिक हैं। उन्हें माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के तहत संरक्षण प्राप्त है। कोर्ट ने मामले में पहले समझौते के आधार पर आपसी विवाद को सुलझाने की मोहलत दी, लेकिन जब मामला हल नहीं हुआ तो कोर्ट ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। ब्यूरो