इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि क्या एक्स सर्विस मैन (भूतपूर्व सैनिक) सेवा में रहते हुए सिविल पदों के लिए आवेदन कर सकता है। इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार के क्या निर्देश हैं? कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय भारत सरकार और निदेशक पुनर्वास के साथ ही राज्य सरकार को भी इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। सुधीर सिंह व दो अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने दिया है।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याचीगण ने एक्स सर्विस मैन कोटे के तहत ग्राम विकास अधिकारी के पद हेतु 2016 में आवेदन किया था। परीक्षा में सफल होने के बाद उनको नियुक्ति मिल गई और उन्होंने फरवरी 2019 में ज्वाइन कर लिया।
इसके बाद कमिश्नर ने एक आदेश जारी कर कहा कि याचीगण को सुनवाई का मौका देते हुए पद से बर्खास्त कर दिया जाए। मई 2019 में याचीगण को सेवा से यह कहते हुए बाहर कर दिया गया कि ग्राम विकास अधिकारी के पद हेतु आवेदन की अंतिम तिथि पांच अक्तूबर 2016 को वह सेना में कार्यरत थे। बिना सेवानिवृत्त हुए उन्होंने आवेदन किया, इसलिए उनकी नियुक्ति अवैध है।