तथ्यों को छिपाए जाने के आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बैंक खाते को फ्रीज करने के आदेश को रद्द करने तथा फिर से खाता संचालन करने का निर्देश जारी करने की मांग में दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गई। अदालत ने कहा कि याची ने तथ्य छिपाकर कोर्ट से राहत पाने की कोशिश की है, इस कारण याचिका खारिज की जाती है।
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव तथा न्यायमूर्ति अजय भनोट की खंडपीठ ने याची रोहित जावा की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची ने 15 मार्च 2021 के जिस पत्र के आधार पर याचिका में रद्द करने की मांग की है, उस पत्र में वर्णित तथ्य को याचिका में छिपा रखा है। याची ने याचिका में यह बात नहीं बताई कि फर्जी पासपोर्ट बनवाने तथा प्रवर्तन निदेशालय की ओर से याची के खिलाफ की जा रही जांच को लेकर उसके खाते को फ्रीज किया गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि याची ने याचिका स्वच्छ मन और हाथों से दाखिल नहीं की, इस कारण याचिका खारिज की जाती है। अदालत ने याचिका वापस करने की याची के अधिवक्ता की मांग को ठुकरा दिया और कहा कि अदालत याचिका खारिज करते हुए याची पर हर्जाना नहीं लगा रही है। कोर्ट ने यह जरूर कहा कि याची भविष्य में याचिका दायर करते समय सभी तथ्य सही तरीके से याचिका में स्पष्ट करेगा।