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हाईकोर्ट : एससी/एसटी मामले पुलिसकर्मियों को राहत, कोर्ट ने कहा-प्रोटेस्ट पिटीशन को परिवाद मानना गलत

Fri, 25 Sep 2026 02:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ के 13 पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत देते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि विरोध याचिका के साथ शपथपत्र दाखिल करने मात्र से उसे परिवाद नहीं माना जा सकता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ के खरखौदा थाने में तैनात 13 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है। कहा है कि प्रोटेस्ट पिटीशन (विरोध याचिका) के साथ शपथपत्र दाखिल करने मात्र से उसे परिवाद नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति संतोष राय ने भुवनेश कुमारी व 12 अन्य की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।

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कोर्ट ने मेरठ के विशेष न्यायाधीश की ओर से छह अक्तूबर 2018 को पारित उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें पुलिस की अंतिम रिपोर्ट खारिज कर प्रोटेस्ट पिटीशन को परिवाद के रूप में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता सरोज का आरोप था कि 18 जून 2017 को थाने में उसके साथ जातिसूचक गालियां, मारपीट और हिरासत में यातना दी गई। विवेचना के बाद पुलिस ने साक्ष्य के अभाव में अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। याची ने इसके खिलाफ प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की। ट्रायल कोर्ट ने शपथपत्र के आधार पर प्रोटेस्ट पिटीशन को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया।

इस आदेश को आरोपी पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि विशेष न्यायाधीश ने केस डायरी का समुचित विश्लेषण किए बिना शपथपत्र, फोटो और अखबार की कतरनों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट खारिज कर दी। आदेश में पर्याप्त कारण भी नहीं बताए गए। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों के पुलिसकर्मी होने के कारण लोक सेवकों को प्राप्त वैधानिक संरक्षण और पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए था।
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कोर्ट ने प्रदेश की अदालतों को आदेश दिया कि अंतिम रिपोर्ट पर निर्णय केस डायरी के स्वतंत्र परीक्षण और स्पष्ट कारणों के आधार पर किया जाए। संज्ञान का आदेश स्पष्ट और तर्कसंगत हो और प्रत्येक आरोपी की विशिष्ट भूमिका पर विचार किया जाए। अंतिम रिपोर्ट का निस्तारण सामान्यतः एक माह में किया जाए। कोर्ट ने सभी अपीलार्थियों को आरोपों से मुक्त मानते हुए आगे की कार्यवाही रद्द कर दी।

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