कोर्ट ने कहा- पुलिसकर्मियों ने पार की अपनी सीमा
पुलिसकर्मियों की ओर से दलील दी गई कि घटना पुलिस के कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान हुई थी। इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सीआरपीसी की धारा 197 के तहत सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेना जरूरी है। ट्रायल कोर्ट ने इन तर्कों को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने कहा कि हिरासत में किसी व्यक्ति को बांधकर बार-बार पीटना आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं हो सकता। इसे यह कहकर भी सही नहीं ठहराया जा सकता कि जांच के दौरान पुलिसकर्मियों ने केवल अपनी सीमा थोड़ी पार कर दी थी।
रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पुलिसकर्मियों ने पहले भी संज्ञान और समन आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, आठ फरवरी 2024 को सक्षम अदालत के समक्ष पेश होने और जमानत अर्जी दाखिल करने की अनुमति लेकर उन्होंने वह याचिका वापस ले ली थी।