उनकी सेवा की स्थिति क्या है। याचियों की ओर से कहा गया कि संस्थान उनकी लंबी सेवावधि को दरकिनार करते हुए उन्हें नई योजना के तहत नियुक्ति कर रहा है। जबकि, वह पहले से नियमित कर्मचारी हैं और उन्हें नियमित कर्मचारी के तौर पर वेतन मिलता रहा है। लेकिन, संस्थान अपने 10 दिसंबर 2019 के आदेश के तहत उन्हें बर्खास्त कर स्व वित्त योजना के तहत संचालित कोर्सों में नियुक्त कर रहा है।
इस तरह की कई याचिकाएं पूर्व में भी दाखिल हैं। कोर्ट ने अपने छह जनवरी 2020 के आदेश के तहत संस्थान द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा रही है। संस्थान इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी जा चुका है लेकिन उसकी याचिका खारिज हो चुकी है। इसके बाद उसने पुनर्विचार याचिका भी दाखिल की लेकिन वह भी खारिज हो चुकी है। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए प्रतिवादियों से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।