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Allahabad High Court Order : एससीएसटी एक्ट के तहत पारित आदेश के खिलाफ धारा 482 में नहीं हो सकती अपील  

Sun, 29 May 2022 02:22 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मामले में याची के खिलाफ लखीमपुर खीरी के नीमगांव थाने में एससीएसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। लखीमपुर खीरी के जिला न्यायालय के विशेष सत्र न्यायाधीश एससीएसटी द्वारा आरोप पत्र के आधार पर याची को समन जारी किया गया था।
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Allahabad High Court
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम (एससीएसटी एक्ट) के अपराध में एक विशेष न्यायाधीश द्वारा पारित समन आदेश के खिलाफ  धारा 482 सीआरपीसी के तहत अपील सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि 482 के तहत अपील दाखिल ही नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि अपील केवल एससीएसटी एक्ट की धारा 14 ए(1) के तहत सुनवाई योग्य है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार ओझा ने अनुज कुमार उर्फ संजय व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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मामले में याची के खिलाफ लखीमपुर खीरी के नीमगांव थाने में एससीएसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। लखीमपुर खीरी के जिला न्यायालय के विशेष सत्र न्यायाधीश एससीएसटी द्वारा आरोप पत्र के आधार पर याची को समन जारी किया गया था। याची ने जारी किए गए समन को रद्द कराने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपील दाखिल की थी।

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अपराध का संज्ञान लेना और तलब करना मध्यवर्ती आदेश

कोर्ट ने कहा कि क्योंकि, क्योंकि एससीएसटी एक्ट विशेष कानून है और सीआरपीसी के प्रावधान पर प्रभावी है। इसलिए इस कानून के तहत आदेश पर अपील दाखिल करने की व्यवस्था इसी कानून की धारा 14 ए(1) में की गई है। कोर्ट ने कहा कि याची द्वारा विशेष न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश के खिलाफ इसी कानून के तहत हाईकोर्ट के समक्ष अपील दाखिल की जा सकती है।


सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपील सुनवाई योग्य नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के गिरीश कुमार सुनेजा बनाम सीबीआई के फैसले का हवाला दिया। जिसमें यह कहा गया है कि अपराध का संज्ञान लेना और आरोपी को तलब करना एक मध्यवर्ती आदेश है। इसलिए विशेष न्यायाधीश एससीएसटी द्वारा पारित आदेश के खिलाफ अपील धारा 482 सीआरपीसी के तहत नहीं की जा सकती है।
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