इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से याची को जारी नोटिस पर राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। याची को अनुच्छेद 226 के तहत कोई राहत नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने मेरिट के आधार पर याचिका को खारिज कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने कौशाम्बी निवासी अजय मिश्रा की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
याची की ओर से तर्क दिया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कानपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने उसे अतिक्रमणकारी बताते हुए नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण ने अपने नोटिस में कहा है कि याची अतिक्रमण को तीन दिन में हटा ले। याची द्वारा किए गए अतिक्रमण से यातायात प्रभावित हो रहा है और इससे दुर्घटना की संभावना बनी हुई है।
अगर याची अतिक्रमण को नहीं हटाता है तो राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत प्राधिकरण उसे हटा देगा। याची ने कहा कि उसने कोई अतिक्रमण नहीं किया है और उसके अभ्यावेदन पर सुनवाई नहीं की गई। इसके साथ ही नोटिस को भी सही तरीकेसे नहीं भेजा गया है।
उसे कोई मुआवजा नहीं दिया गया, जबकि प्राधिकरण के अधिवक्ता प्रांजल मेहरोत्रा ने तर्क दिया कि हाईवे के चौड़ीकरण के लिए याची की भूमि अधिग्रहीत की गई है। उसे 40 हजार रुपये मुआवजे के भुगतान को कहा गया है। तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी।