इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारी के रिटायर होने के 13 साल बाद उसके विरुद्ध की गई कार्रवाई को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि घटना के 18 साल बाद हुई जांच कार्यवाही में नैसर्गिक न्याय का पालन नहीं किया गया व कर्मचारी के सेवानिवृत्त हुए 13 साल बीत जाने के कारण नए सिरे से जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है।
कोर्ट ने विभागीय जांच में बिना सफाई का मौका दिए दंडित करने के आदेश को रद्द कर दिया है और कहा है कि याची सेवानिवृत्ति परिलाभ पाने का हकदार है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सूर्यपाल कश्यप की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
याची का कहना था कि वह फर्रुखाबाद जिला अदालत में क्लर्क पद पर कार्यरत था। 1988 में नरेंद्र कुमार बनाम शोभा कटियार केस की फाइल गायब हो गई, जिसकी शिकायत की गई तो जिला जज ने प्रारंभिक जांच सिविल जज सीनियर डिवीजन से कराई। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर नियमित जांच बैठाई गई। 27 फरवरी 2007 को चार्जशीट दी गई और दो दिन में 2 मार्च तक जवाब देने को कहा गया। याची की मांग पर 23 मार्च तक का समय दिया गया। कुछ दिन का और समय मांगा तो अर्जी निरस्त कर दी गई।
दूसरे दिन जांच रिपोर्ट पेश की गई। याची को दोषी करार देते हुए रैंक में सबसे नीचे वेतनमान पर करने का दंड दिया गया। अपील भी प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने खारिज कर दी तो यह याचिका दायर की गई। याची अधिवक्ता का कहना था कि उसे सफाई देने व सुनवाई का अवसर व गवाहों की प्रतिपरीक्षा करने का मौका नहीं दिया गया। न ही मौखिक सुनवाई की गई। उसकी 30 साल की सेवा बेदाग है। फाइल डिस्पैच रजिस्टर में चढ़ी है। फाइल भेजी गई है। इसपर विचार नहीं किया गया। कोर्ट ने दंड आदेश को नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत करार देते हुए रद्द कर दिया।
षड्यंत्र, धोखाधड़ी के आरोपी की सशर्त जमानत मंजूर
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने षड्यंत्र, धोखाधड़ी के आरोपी कानपुर नगर के विवेक तिवारी की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। आरोपी को व्यक्तिगत मुचलके व दो प्रतिभूतियों पर रिहा करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अली जामिन ने दिया है।
मामले के अनुसार मेसर्स बायोमास रिसर्च एंड टेक्निकल सोल्यूशन प्रा लि कंपनी के प्रोपराइटर सुमित अवस्थी व रामवती अवस्थी ने इसी नाम से फर्म खोली और कंपनी का पैसा हजम कर गए। सुमित अवस्थी के खिलाफ 34 व रामवती अवस्थी के खिलाफ 25 आपराधिक मामले दर्ज हैं। एक केस के अलावा सभी में जमानत पर रिहा हैं। इस केस में सुमित, रामवती व ऋषिनाथ अवस्थी की जमानत हो चुकी है। याची सुमित का साला है। 19 जुलाई 16 से जेल में बंद है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि सह अभियुक्तों को जमानत मिली है, इसलिए उसे भी जमानत पर रिहा किया जाए। सरकारी वकील का कहना था कि याची पर हत्या का भी केस है। इसके खिलाफ 21केस दर्ज हैं। इसलिए अर्जी खारिज की जाए। दोनो पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने लंबे समय से जेल की अवधि को देखते हुए सशर्त जमानत मंजूर कर ली है।
प्रशिक्षण अवधि में किये गए भुगतान की वसूली पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में तैनात उपनिरीक्षक से प्रशिक्षण अवधि के दौरान किए गए वेतन भुगतान की वसूली पर रोक लगा दी है तथा प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। उप निरीक्षक अजय कुमार ओझा की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने दिया ।
याची के अधिवक्ता अनिल सिंह बिसेन का कहना था कि याची 2005 में उप निरीक्षक पद पर चयनित हुआ। उसे प्रशिक्षण की अवधि में स्टाइपेंड की जगह वेतन का भुगतान किया गया। बाद में 8 मार्च 2020 को उसके वेतन से वसूली का आदेश वित्त नियंत्रक पुलिस भवन लखनऊ ने जारी कर दिया। याचिका में इस आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने वेतन से वसूली पर रोक लगाते हुए प्रदेश सरकार से इस मामले में 3 सप्ताह में जवाब मांगा है।