कोर्ट ने जिला जज को मामले की सुनवाई दूसरे जज को ट्रांसफर करने को कहा है। इसकेसाथ ही हैरानी जताई कि हाईकोर्ट के समक्ष मुकदमा लंबित रहने और अंतरिम आदेश पारित होने के बावजूद अपर सिविल जज ने कैसे आदेश पारित कर दिया, जबकि उनकी ओर से आदेश पारित नहीं किया जा सकता है।
हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बाद भी याची को नोटिस भेजने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्धनगर के अपर सिविल जज से स्पष्टीकरण मांगा है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई केलिए मामले को मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया जाए? कोर्ट ने अपर सिविल जज से 30 मई तक स्पष्टीकरण देने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. केजे ठाकर और न्यायमूर्ति अजय कुमार त्यागी की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम की याचिका पर दिया है।
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कोर्ट ने जिला जज को मामले की सुनवाई दूसरे जज को ट्रांसफर करने को कहा है। इसकेसाथ ही हैरानी जताई कि हाईकोर्ट के समक्ष मुकदमा लंबित रहने और अंतरिम आदेश पारित होने के बावजूद अपर सिविल जज ने कैसे आदेश पारित कर दिया, जबकि उनकी ओर से आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने अपने आदेश में इस मामले की व्याख्या विस्तार से नहीं की है। कोर्ट ने कहा कि सीपीसी की धारा 151 के तहत ऐसा आदेश पारित नहीं किया जा सकता था। कोर्ट ने आदेश का अनुपालन कराने केलिए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी निर्देशित किया है।