इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा भुगतान के मामले में इंश्योरेंस कंपनी को राहत दी है। कोर्ट ने कंपनी को दावा भुगतान के मामले में ब्याज की रकम को 12 फीसदी से घटाकर सात फीसदी की दर से भुगतान करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा अगर मामले में कोई भुगतान पहले किया गया है तो उस रकम को मुआवजे की रकम भुगतान करते समय समायोजित कर लिया। यह आदेश न्यायमूर्ति कौशल जयंत ठाकर और न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने याची विमला देवी व अन्य चार सहित दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है।
ट्रिब्यूनल के आदेश को दी गई थी चुनौती
मामले में मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के आदेश को चुनौती दी गई थी। इंश्योरेंस कंपनी ओर से यह भी कहा गया कि न्यायाधिकरण ने तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया और एकतरफा फैसला सुनाया। कहा कि मामले में 26 माह बाद एफआईआर दर्ज की गई और ढाई साल विलंब से दावा याचिका दाखिल की गई।
न्यायाधिकरण ने 22 लाख, 98 हजार, 900 रुपये के दावे का भुगतान का आदेश दिया है। उस पर दावा याचिका दायर करने की तिथि से दावा भुगतान की तिथि तक 12 फीसदी की दर से ब्याज देने का आदेश दिया है।
इंश्योरेंस कंपनी ने कहा कि ब्याज दर अधिक है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई के बाद माना कि न्यायाधिकरण ने ब्याज दर को ऊंची दर पर भुगतान का आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने न्यायाधिकरण केइस आदेश को बदलते हुए साढ़े सात फीसदी की दर से ब्याज के भुगतान का आदेश दिया।
यह था मामला
हरिदास गौतम, विजय गौतम, पंकज कुमार शर्मा लखनऊ से अपने घर (जिला बस्ती) कार से लौट रहे थे। रास्ते में दुर्घटना होने से हरिदास गौतम और विजय गौतम गंभीर रूप से जख्मी हो गए और पंकज शर्मा और चालक को हल्टी चोटें आईं। हरिदास की उपचार के दौरान मौत हो गई। वह मुख्य फार्मासिस्ट थे। उनके वैध उत्तराधिकारी ने मोटर दुर्घटना दावा भुगतान केलिए न्यायाधिकरण के समक्ष आवेदन किया था।