सभी मेडिकल कॉलेजों के एक्सरे तकनीशियनों को 4200 का वेतनमान दिया जा रहा है, जबकि याची इस लाभ से वंचित चल रहा था। याची ने शासन स्तर प्रत्यावेदन दिया था, जिसके क्रम में महानिदेशक ने प्रधानाचार्य से आख्या तलब की थी, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नही लिया गया। जिससे क्षुब्द याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याची के अधिवक्ता सुनील यादव ने दलील दी कि रेडियो थेरेपी ऑपरेटर का पद एक्स-रे तकनीशियन कैडर का पद है। पूर्व में निर्गत शासनादेश के जरिए इसका पदनाम बदल दिया गया था, जबकि रेडियो थेरपी ऑपरेटर का कार्य एक्स-राय टेक्निशियन के समान ही है। इसलिए समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के मुताबिक याची मेडिकल कॉलेजों के एक्सरे तकनीशियनों के समान वेतनमान पाने का हकदार है।
कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशक को याची के वेतन विसंगतियों पर विधि अनुसार निर्णय लेते हुए आदेश पारित करने और तीस दिन के भीतर संशोधित वेतनमान के मुताबिक बकाए वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया।