इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्याय को आमजन तक सहज और समझने योग्य बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। 160वें स्थापना दिवस पर हाईकोर्ट ने कहा कि उसके निर्णय केवल अंग्रेजी तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि हिंदी में भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्याय को आमजन तक सहज और समझने योग्य बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। 160वें स्थापना दिवस पर हाईकोर्ट ने कहा कि उसके निर्णय केवल अंग्रेजी तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि हिंदी में भी उपलब्ध कराए जाएंगे। 17 मार्च से सभी नॉन-एएफआर अंतिम निर्णयों और आदेशों का हिंदी में अनुवाद किया जाएगा।
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यह नई व्यवस्था इलाहाबाद मुख्य पीठ और लखनऊ खंडपीठ दोनों पर लागू होगी। इसके तहत तीन पृष्ठ या उससे अधिक के नॉन-एएफआर अंतिम फैसलों और आदेशों का हिंदी अनुवाद किया जाएगा जिससे वादियों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों को न्यायालय के निर्णयों को समझने में आसानी होगी।
अब तक केवल कुछ सीमित श्रेणियों के निर्णयों का ही हिंदी अनुवाद किया जाता था लेकिन इस पहल के बाद व्यापक स्तर पर फैसलों को हिंदी में उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही एएफआर (प्रकाशन योग्य) निर्णयों और उत्तर प्रदेश, मुंबई हाईकोर्ट और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के मामलों के फैसलों का भी हिंदी अनुवाद किया जा रहा है।
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न्यायालय प्रशासन के अनुसार, सभी अनुवादित निर्णय उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर डिजिटल रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे कोई भी व्यक्ति उन्हें आसानी से पढ़ और समझ सकेगा।
यह अनुवाद सुवास सेल (इलाहाबाद एवं लखनऊ) की ओर से मुख्य न्यायमूर्ति के संरक्षण में और एआई आधारित विधिक अनुवाद सलाहकार, ई-एएचसीआर और आईएलआर समिति के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है।