इलाहाबाद हाईकोर्ट के 46 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शनिवार को जस्टिस दिलीप बाबा साहेब भोसले ने शपथ ग्रहण किया। मुख्य न्यायाधीश कक्ष में आयोजित सादे किंतु गरिमामय समारोह में प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह का साक्षी बनने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ पीठ के सभी न्यायाधीशों के अलावा विभिन्न उच्च न्यायालयों के करीब 24 न्यायमूर्तिगण, प्रदेश के आला अधिकारी, गणमान्य नागरिक, अधिवक्ता और न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश दिलीप भोसले का जन्म 24 अक्तूबर 1956 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ। उनके पिता बाबा साहेब भोसले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। प्रारंभिक शिक्षा मुंबई से हासिल करने के बाद उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कालेज मुंबई से विधि स्नातक की उपाधि ली। वर्ष 1980 से बाम्बे हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। जस्टिस भोसले 1986 से 91 तक असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर और असिस्टेंड प्रासिक्यूटर रहे। उन्होंने हाईकोर्ट में भारत सरकार और महाराष्ट्र सरकार के स्पेशल काउंसिल के तौर पर कई महत्वपूर्ण मुकदमों की पैरवी की। साथ ही महाराष्ट्र स्टेट फारमिंग कारपोरेशन, महाराष्ट्र स्टेट फाइनेंस कारपोरेशन, स्टेट मार्केटिंग फेडरेशन, कॉटन ग्रोवर फेडरेशन का भी हाईकोर्ट में प्रतिनिधित्व किया। वह कई शिक्षण संस्थाओं, सुगर कंपनियों, कोऑपरेटिव बैंक, बैंक, म्युनिस्पल कारपोरेशन और कोऑरेटिव सोसाइटी के स्थायी अधिवक्ता भी रहे।
वकालत के दौरान जस्टिस भोसले पांच बार राज्य बार कौंसिल के लिए चुने गए। इस दौरान 1987-88 में वह बार कौंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा के उपाध्यक्ष तथा 93-94 में अध्यक्ष रहे। 1998 में बार कौंसिल ऑफ इंडिया और लीगज एजूकेशन कमेटी सदस्य बने। वर्ष 1999 में उन्होंने क्वालालंपुर में हुए कॉमन वेल्थ लॉयर्स कान्फ्रेंस में भारतीय दल का प्रतिनिधित्व किया।
22 जनवरी 2001 को वह बाम्बे हाईकोर्ट के जज बनाए गए। वहां से छह जून 2012 को कर्नाटक उच्च न्यायालय स्थानांतरित किए गए तथा एक दिसंबर 2014 को हैदराबाद हाईकोर्ट के सीनियर जज और बाद में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बने। उनके परिवार में मां के अतिरिक्त पत्नी अरुंधती, बेटी नेहा भोसले रनदवे, बेटा करन भोसले, पुत्रवधू वासवी तिवारी भोसले शामिल हैं। परिवार मुंबई में रहता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस : जस्टिस डीबी भोसले : एक परिचय
जस्टिस दिलीप बाबा साहेब भोसले तेलंगाना और आंध्र प्रदेश इन दो राज्यों की हैदराबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने हैं। शनिवार को जब उन्हाेंने चार्ज लिया तो वे इलाहाबाद हाईकोर्ट के 46वें चीफ जस्टिस के रूप में इतिहास में दर्ज हो गए।
जन्म : 24 अक्तूबर 1956
उम्र : 59 वर्ष 3 महीने
शिक्षा : गवर्नमेंट कॉलेज मुंबई से ऑनर्स व लॉ की डिग्री।
पिता : जस्टिस डीबी भोसले के पिता बाबासाहेब भोसले स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे। वे 21 जनवरी 1982 से 1 फरवरी 1983 तक 377 दिन के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे।
वकालत : जस्टिस डीबी भोसले 11 अक्तूबर 1979 को वकील के रूप में एनरोल हुए और बार से जुड़ कर बांबे हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की। यहां वे सिविल, क्रिमिनल व आपराधिक मामलों पर काम करते हुए आपराधिक व संपत्ति कानूनों के विशेषज्ञ बने। वर्ष 1986 से 1998 तक वे हाईकोर्ट के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता ग्रुप-1 व सहायक सरकारी अधिवक्ता भी रहे। महाराष्ट्र राज्य कृषि निगम, वित्त निगम, कपास उत्पादन मार्केटिंग फेडरेशन सहित लगभग सभी निगमों के लिए हाईकोर्ट में प्रतिनिधि रहे।
बार काउंसिल में : वर्ष 1985 में उन्हें महाराष्ट्र व गोवा बार काउंसिल में सदस्य चुना गया, वे देश में किसी प्रदेश की बार काउंसिल के सबसे कम उम्र सदस्य बने। वर्ष 1987-88 में वे उपाध्यक्ष व 1993-94 में अध्यक्ष चुने गए। उन्हें 1998 में महाराष्ट्र व गोवा से बार काउंसिल ऑफ इंडिया का सदस्य चुना गया। दोनों बार काउंसिल में रहते हुए उन्हाेंने सभी वकीलों को बार काउंसिल चुनाव में वोट देने के अधिकार वापस दिलाया और लॉ ग्रेजुएट्स के लिए एनरोलमेंट से पहले ट्रेनिंग की व्यवस्था खत्म करवाई।
बतौर जज : 22 जनवरी 2001 को बांबे हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज बने और एक वर्ष बाद स्थायी जज बनाए गए। 6 जनवरी 2012 को कर्नाटक हाईकोर्ट में ट्रांसफर किए गए। यहां से करीब दो साल बाद 1 दिसंबर 2014 को हैदराबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर किए गए। 8 दिसंबर 2014 को उन्हाेंने वरिष्ठतम जज के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। 7 मई 2015 को तेलंगाना और आंध्रप्रदेश की हैदराबाद स्थित हाईकोर्ट में उन्हाेंने चीफ जस्टिस के रूप में कार्यभार संभाला।
जज के रूप में अहम फैसले
1. केसेस ऑनलाइन : चीफ जस्टिस बनकर जस्टिस भोसले ने मुकदमों और उनके स्टेटस को ऑनलाइन करने की व्यवस्था शुरू की। ऑनलाइन सुविधा के जरिए उन्हाेंने विभिन्न पक्षों को न्यायिक व्यवस्था से सुगमता से जोड़ने का काम किया।
2. पर्यावरण : फ्लाई ओवर बनाने के लिए हैदराबाद में जब हजारों की संख्या में पेड़ काटे जा रहे थे तो मामले की निगरानी के लिए न्याय मित्र नियुक्त किया।
3. रंगे फलों पर रोक : फल विक्रेताओं द्वारा बाजार में बेचे जा रहे फलों को रंगने के मामले को उन्हाेंने बेहद संजीदगी से लिया और नागरिकों की सेहत पर बड़ा खतरा मानते हुए इस पर रोक लगवाई।
4. तेलंगाना हाईकोर्ट मांग विवाद : तेलंगाना राज्य के लिए आंध्रप्रदेश से अलग हाईकोर्ट की मांग कर रहे निचली अदालतों के सैकड़ों जजों ने जब हैदराबाद में मार्च निकाला तो उन्हाेंने इस मांगे को रिव्यू करने के लिए पांच सदस्यीय पैनल बनाया। हालांकि इसी मामले में उनके नेतृत्व में हाईकोर्ट ने कई जजों को अनुशासनहीनता के मामले में निलंबित किया। खास बात है कि जब उनके पिता महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, उसी दौरान बांबे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच का गठन हुआ था और बाबासाहेब भोसले ने उसका उद्घाटन किया।