अर्जियों को गुण दोष के आधार पर निस्तारित करना था
याचिका में किसानों का कहना था कि दशकों पहले एक ही अधिसूचना से अधिग्रहित जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा पाने के लिए उन लोगों ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के समक्ष धारा 28-ए की अर्जी दी थी लेकिन आज तक उसका निस्तारण नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा था कि अधिकारी को गुण दोष के आधार पर दाखिल अर्जियों का निस्तारण कर देना चाहिए न कि उसे लटकाए रखा जाए।
बढ़ाकर मुआवजा देने के आदेश पर दाखिल होती है 28-ए की अर्जी
भूमि अधिग्रहण कानून 1894 में धारा 28-ए के तहत किसान अर्जी तब देता है जब एक ही अधिसूचना से बहुत सारी जमीनों का अधिग्रहण किया गया हो और कोर्ट ने उस अधिसूचना से संबंधित अन्य भूमि का मुआवजा बढ़ाकर देने का निर्देश दिया हो। कोर्ट के इस आदेश के बाद अन्य किसानों के लिए यह प्रावधान बना है कि वह भी धारा 28-ए भूमि अधिग्रहण कानून के अंतर्गत स्पेशल लैंड एक्विजिशन अधिकारी को अर्जी देकर अपनी भूमि का बढ़ा हुआ मुआवजा प्राप्त करें।