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Allahabad High Court :  भूमि अधिग्रहण मामले में किसानों की 3454 अर्जियां निस्तारित

Mon, 23 May 2022 10:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ ने बुलंदशहर के राजवीर सिंह व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाओं को निस्तारित कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि उन सभी किसानों को जिनकी अर्जियों का निस्तारण कर दिया गया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में राजस्व सचिव ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि प्रदेश के कुल 75 में से 55 जिलों में किसानों के भूमि अधिग्रहण मामले में धारा 28-ए  की कोई अर्जी लंबित नहीं है। सचिव ने बताया कि 20 जिलों में 4354 अर्जियां लंबित थीं, जिसका निस्तारण कर दिया गया है। आज की तारीख में किसानों की कोई भी अर्जी लंबित नहीं है।

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मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ ने बुलंदशहर के राजवीर सिंह व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाओं को निस्तारित कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि उन सभी किसानों को जिनकी अर्जियों का निस्तारण कर दिया गया है, उन्हें आदेश की प्रति भेजी जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन किसानों के पक्ष में आदेश पारित हुआ है, उनके बढ़े हुए मुआवजे की रकम को तीन माह के अंदर उनके बैंक खाते में भेज दी जाए। सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने बहस की।



हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 28-ए के अंतर्गत दाखिल अर्जियों का समय से निपटारा न कर पाने पर नाराजगी जताई थी। हाईकोर्ट ने सचिव राजस्व से इस संबंध में 10 मई से पहले हलफनामा मांगा था और कहा था कि यदि उनका हलफनामा संतोषजनक नहीं पाया गया तो अदालत उनके खिलाफ  कोर्ट के आदेश की अवमानना की प्रक्रिया शुरू करेगी।

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अर्जियों को गुण दोष के आधार पर निस्तारित करना था
याचिका में किसानों का कहना था कि दशकों पहले एक ही अधिसूचना से अधिग्रहित जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा पाने के लिए उन लोगों ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के समक्ष धारा 28-ए की अर्जी दी थी लेकिन आज तक उसका निस्तारण नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा था कि अधिकारी को गुण दोष के आधार पर दाखिल अर्जियों का निस्तारण कर देना चाहिए न कि उसे लटकाए रखा जाए।


बढ़ाकर मुआवजा देने के आदेश पर दाखिल होती है 28-ए की अर्जी
भूमि अधिग्रहण कानून 1894 में धारा 28-ए के तहत किसान अर्जी तब देता है जब एक ही अधिसूचना से बहुत सारी जमीनों का अधिग्रहण किया गया हो और कोर्ट ने उस अधिसूचना से संबंधित अन्य भूमि का मुआवजा बढ़ाकर देने का निर्देश दिया हो। कोर्ट के इस आदेश के बाद अन्य किसानों के लिए यह प्रावधान बना है कि वह भी धारा 28-ए भूमि अधिग्रहण कानून के अंतर्गत स्पेशल लैंड एक्विजिशन अधिकारी को अर्जी देकर अपनी भूमि का बढ़ा हुआ मुआवजा प्राप्त करें।
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