पूर्व के चुनावों में भी इलाहाबाद सीट पर जाति को हथियार बनाकर लड़ाई होती रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी लगातार तीन बार वर्ष 1996, 1998 और 1999 में इलाहाबाद सीट से सांसद रहे। 1996 के चुनाव में बसपा ने उनके खिलाफ राम सेवक सिंह पटेल और 1999 में राम दुलार सिंह पटेल को चुनाव मैदान में उतारा था। वर्ष 2004 में जब रेवती रमण सिंह सपा के टिकट पर यहां से चुनाव जीते तो उस वक्त बसपा ने आरके सिंह पटेल को टिकट दिया था। इस चुनाव में भाजपा के टिकट पर लड़े डॉ. मुरली मनोहर जोशी दूसरे नंबर पर थे।
भाजपा प्रत्याशी डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने पहले ही चक्र से अपने प्रतिद्वंद्वी गठबंधन प्रत्याशी राजेंद्र सिंह के खिलाफ 8144 वोटों के अंतर से बढ़त बना ली थी। दूसरे चरण की मतगणना में रीता ने फिर 8646 मतों से बढ़त हासिल कर ली और अब कुल बढ़त 16790 मतों की हो चुकी थी। डॉ. रीता जोशी चरण की मतगणना के साथ तेजी से आगे बढ़ रहीं थीं और प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी के समर्थकों के चेहरे पर शिकन बढ़ती जा रही थी। वहां मौजूद गठबंधन प्रत्याशी के अभिकर्ताओं को समझने में देर नहीं लगी कि मामला अब हाथ से निकल चुका है। कई बूथों की मतगणना पूरी होने से काफी पहले ही अभिकर्ता वहां से चले गए।
मतगणना के पहले ही चरण में कांग्रेस प्रत्याश की हार के संकेत मिल गए। इस चरण में भाजपा और गठबंधन को जहां हजारों की संख्या में वोट मिले, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी योगेश शुक्ला को महज 87 वोटों से संतोष करना पड़ा दूसरे चरण में भी कांग्रेस प्रत्याशी की हालत काफी खराब रही और प्रत्याशी को महज 144 वोट मिले। तकरीबन सभी चरणों में कांग्रेस प्रत्याशी की यही हालत रही।