प्रयागराज-फाफामऊ-जंघई रेलमार्ग पर मुख्य संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) के स्पीड ट्रायल के साथ ही महाकुंभ के पूर्व संगमनगरी से बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी जाने वाले तीनों रेल मार्ग का अब दोहरीकरण हो चुका है। यह तीनों ही रेलमार्ग अलग-अलग तीन जोनल रेलवे के अधीन हैं। इसमें से दो रेलमार्ग का बीते एक माह के अंदर ही दोहरीकरण का कार्य संपन्न हुआ है।
अब वाराणसी जाने वाले तीन रेलमार्ग का दोहरीकरण होने से महाकुंभ पर चलने वाली स्पेशल ट्रेनों का आवागमन और सुगम हो जाएगा। प्रयागराज से वाराणसी के लिए कुल तीन रेलमार्ग हैं। इन तीनों ही में सबसे लंबा रास्ता वाया मिर्जापुर होकर ही है। इसका अधिकांश भाग उत्तर मध्य रेलवे के ही अधीन है।
वाराणसी जाने को माहभर पूर्व यह एकमात्र दोहरीकरण वाला रेलमार्ग था, लेकिन अब एक माहभर में ही दो अन्य रेलमार्ग भी दोहरी लाइन वाले हो गए हैं। इसमें प्रयागराज जंक्शन-प्रयागराज रामबाग-ज्ञानपुर रोड-वाराणसी रेलमार्ग प्रमुख रूप से शामिल हैं।पीएम मोदी ने 13 दिसंबर को ही इस रेलमार्ग पर बने नए गंगा पुल के साथ दोहरीकरण का लोकार्पण किया था। यह रेलमार्ग पूर्वोत्तर रेलवे के अधीन है।
इसी तरह वाराणसी के लिए एक अन्य तीसरे रेलमार्ग का भी दोहरीकरण हो चुका है। प्रयागराज जंक्शन-फाफामऊ-जंघई-वाराणसी रेल मार्ग के फाफामऊ-उग्रसेनपुर रेलखंड का शनिवार को ही सीआरएस ने ट्रायल लिया। डीआरएम लखनऊ एसएम शर्मा का कहना है कि दोहरीकरण हुए फाफामऊ-जंघई रेलमार्ग पर सीआरएस ट्रायल के बाद ट्रेन संचालन की अनुमति दे दी गई है।