नोटबंदी ओर जीएसटी की मार से व्यापारी अभी उभरे ही थे कि बाजार में आई मंदी ने तमाम कारोबारियों के चेहरे की रौनक गायब कर दी है। बाजार में छाई मंदी को लेकर वित्त मंत्री ने भले ही राहत पैकेज घोषित किए हो लेकिन कारोबारी इससे खुश नहीं है। सोने-चांदी के दाम में आई तेजी की वजह से सराफा मार्केट से हलचल गायब है।
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नतीजा यह है कि सराफा बाजार में बंगाल के कई कारीगरों को वापस भेज दिया गया है। ऑटो मोबाइल में भी बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है। दुपहिया और चारपहिया वाहनों की बिक्री में 25 से 40 फीसदी की कमी आई है। कपड़ा मार्केट हो या फिर फुटवियर, कहीं भी व्यापारियों को राहत नहीं है। सबसे बुरा हाल रियल स्टेट का है। अब कारोबारियों को नवरात्र का इंतजार है, ताकि वे अपने कारोबार को पटरी पर ला सकें।
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नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी के बाद से शहर का सराफा बाजार अब तक उबर नहीं सका है। इस बीच बाजार में छाई मंदी और रोज-रोज सोने चांदी की कीमतों में हो रहे इजाफे से सराफा बाजार से ग्र्राहक तकरीबन गायब ही हो गए हैं। मीरगंज का सराफा बाजार हो या फिर सिविल लाइंस, चौक के बड़े बड़े ज्वैलरी के शोरूम। ग्राहकों की गिरती संख्या से सराफा कारोबारी बेहद निराश हैं। आलम ये है कि दुकानों में काम न होने की वजह से वहां काम करने वाले कारीगरों को छुट्टी दे दी गई है।
प्रयाग सराफा मंडल के अध्यक्ष कुलदीप सोनी की मानें तो शहर में पांच हजार के आसपास आभूषण कारीगर हैं। इसमें भी अधिकांश बंगाल के हैं। बीते कुछ माह से बाजार में छाई मंदी की वजह से इन कारीगरों को काम तक नहीं मिल पा रहा। मजबूरी में ये कारीगर घर वापसी कर रहे हैं। बीते छह माह की ही बात करें तो सोने के दाम में प्रति दस ग्राम में 5600 रुपये की वृद्धि हो चुकी है। रानी मंडी स्थित बच्चा जी ज्वैलर्स के अमिताभ टंडन भी बाजार में आई मंदी से खासे निराश हैं।
Automobile sector sales drop in july 2019
- फोटो : Social
ऑटोमोबाइल मार्केट में 30 फीसदी की गिरावट
दो वर्ष पूर्व जीएसटी लगने के बाद ऑटोमोबाइल बाजार बमुश्किल जहां अभी पटरी पर आया ही था कि वहीं आर्थिक मंदी ने उसे एक बार फिर से बैकफुट पर ला दिया। चार पहिया वाहन हो या फिर दो पहिया। इन सभी की खरीद फरोख्त में 30 फीसदी तक की गिरावट आई है। पिछले वर्ष जुलाई-अगस्त में जहां जिले में 7500 से ज्यादा दो पहिया एवं 1200 के आसपास चार पहिया वाहन की बिक्री हुई थी, वह इस बार घटी है। आरटीओ कार्यालय से प्राप्त आंकड़े पर नजर डालें तो बीते एक माह के दौरान 6506 दो पहिया एवं 793 चार पहिया वाहन जिले के विभिन्न शोरूम में बिके। कान्हा मोटर्स के प्रोपराइटर शिव रतन अग्रवाल का कहना है कि मार्केट में काफी मंदी आई हुई है। दो पहिया वाहन की बिक्री में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। इसी तरह युनाइटेड ऑटो मोबाइल्स के ऋषि गुलाटी ने भी चार पहिया वाहन की बिक्री में आई गिरावट को लेकर निराशा जताई। कहा कि पिछले सीजन के मुकाबले इस बार वाहन बिक्री में 30 प्रतिशत की कमी आई है। बाजार में कैश कम है। कहा कि मार्केट के रुख को देखकर यही लग रहा है कि नवरात्र भी इस बार ठंडा ही रहेगा।
कार EMI
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गाड़ियों की ईएमआई चुका नहीं पा रहे ट्रांसपोर्टर
आर्थिक मंदी को भांप लेने में माहिर ट्रांसपोर्ट कारोबार में भी हालात बदतर होते जा रहे हैं। गाड़ियों की किस्त न चुका पाने के मामले इस बीच बढ़ गए हैं। ट्रांसपोर्ट संगठनों ने बैंकों और नॉन बैकिंग फाइनेसिंग कंपनियों से ईएमआई की री-शेडयूलिंग की गुहार लगाई है। बाजार में ट्रांसपोर्टरों को भाड़ा भी कम मिल रहा है। इसकी वजह माल ढुलाई की आवक कम होना बताई जा रही है। प्रयागराज ट्रक एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुशवाहा ने कहा ट्रांसपोर्टर आर्थिक मंदी की वजह से खासे परेशान हैं। उन्होंने बताया कि उनके संपर्क में कई ऐेसे ट्रांसपोर्टर हैं जो अपनी गाड़ियों की ईएमआई तक नहीं चुका पा रहे हैं। बाजार का बहुत बुरा हाल है। यह भले ही आर्थिक मंदी की शुरुआत है, लेकिन आने वाले दिन ट्रांसपोर्टरों के लिए और बुरे हो सकते हैं। ट्रक रूट पर ट्रकों को रिटर्न लोड के लिए सात-आठ दिन इंतजार करना पड़ रहा है। कई ऑपरेटरों ने दो-तीन साल पुरानी गाड़ियां भारी नुकसान के साथ सरेंडर भी कर दीं।
बाहर किए जा रहे कपड़े की दुकान पर काम करने वाले कर्मचारी
शहर का कपड़ा मार्केट हो या फिर फुटवियर मार्केट, मंदी की शुरुआती मार से ही कारोबारी परेशान हैं। चौक, सिविल लाइंस समेत तमाम कपड़े एवं जूतों की दुकान पर काम करने वाले लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। कपड़े के थोक कारोबारी गुरुशरण दास अरोरा उर्फ चन्नी भइया का कहना है कि होली के बाद से ही मार्केट में रौनक नहीं है। थोड़ा बहुत काम हुआ भी तो वह स्कूल ड्रेस का ही रहा। सन्नाटे की वजह से तमाम दुकानों का डेली का भी खर्चा नहीं निकल रहा। प्रयाग व्यापार मंडल के अध्यक्ष विजय अरोरा ने कहा कि मंदी की वजह से कपड़ा बाजार में गजब का सन्नाटा पसरा हुआ है। फुटवियर के थोक कारोबारी योगेश गोयल ने अमूमन इस सीजन में पहले 150 से 200 जोड़ी जूतों का आर्डर मिल जाता था, लेकिन इस बार यह घटकर 50 से 70 जोड़ी तक पहुंच गया है। बिक्री न होने की वजह से आगरा, दिल्ली से माल भी अब कम आ रहा है। बाजार से कैश गायब है, लोग डिजिटल पेमेंट करने से भी अब भी सहज नहीं है। टीवी, फ्रिज, एसी आदि की दुकानों पर भी चहल पहल कम होने से व्यापारी निराश हैं। आशा एंड कंपनी के प्रवीण मालवीय ने कहा कि अब फेस्टिव सीजन से ही कुछ आस है।