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शहरियों की आफत पर कन्नी काट रहे सभी

Thu, 21 Apr 2016 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सेना भर्ती
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कुमायूं (111 पैदल वाहिनी) प्रादेशिक सेना की ओर से मंगलवार को न्यू कैंट में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया के पहले दिन शहर में जुटे अभ्यर्थियों द्वारा किए गए बवाल से शहरियों की फजीहत की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। आर्मी अपने आप को दोषमुक्त मान रही है तो जिला प्रशासन अलग तर्क दे रहा है। इलाहाबाद में आए दिन भर्ती परीक्षाएं होती हैं और इन परीक्षाओं में बवाल होता रहे तो शहरियों की आए दिन फजीहत तय है। इस के बावजूद इस मामले को लेकर जिला प्रशासन कोई सीख लेने को तैयार नहीं है।
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मंगलवार को शहर में हुए बवाल पर सेना का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में सेना की ओर से पूरी तरह से एहतियात बरता गया था।

भर्ती प्रक्रिया के अधिकारी कैप्टन जेके चैतन्या कहते हैं, प्रशासन के साथ बैठक कर सुरक्षा की जिम्मेदारी तय कर दी गई थी और जो भी बवाल हुआ, वह आर्मी एरिया से बाहर हुआ। आर्मी के जनसंपर्क अधिकारी बीबी पांडेय कहते हैं, सेना ने तो अपने इलाके में सुरक्षा की व्यवस्था की ही थी। इसके अलावा रेलवे और बस स्टेशन पर भी अभ्यर्थियों को सूचना देने के लिए जवानों को तैनात किया था ताकि उन्हें कहीं भटकना ना पड़े। जवान उन्हें बराबर भर्ती स्थल की जानकारी दे रहे थे। दरअसल सेना ऐसे ही केंद्रों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित कराती है, जहां अभ्यर्थी आसानी से पहुंच सकें। उधर, एडीएम प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था में पुख्ता इंतजाम न किए जाने के सवाल पर माना कि अभ्यर्थियों की संख्या अप्रत्याशित रही। भर्ती में इतने अभ्यर्थियों के आने की उम्मीद नहीं थी। सेना और जिला प्रशासन के इस तरह के जवाब से शहरियों को कोई राहत नहीं है।

भर्ती रैली में बार-बार उत्पात झेल रहे शहरी
 सेना की भर्ती रैली हर बार शहरियों के लिए मुसीबत का सबब बनती है। बीच शहर में होने वाली भर्ती रैली में आने वाले ऐसे हजारों युवक शहर में हुड़दंग करते हैं। दुकानों-ठेलों से खाने-पीने की चीजें और लोगों से पैसे-मोबाइल लूटते हैं। जो कोई विरोध करे, वह युवकों की भीड़ में फंसकर मारपीट का शिकार होता है। भर्ती रैली में तमाम जिलों के ग्रामीण इलाकों केयुवक शहर आकर इस कदर उत्पात मचाते हैं कि अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जैसा सोमवार को रात भर और मंगलवार को पूरे दिन भर्ती रैली में शामिल होने आए हजारों युवकों ने मारपीट, लूटपाट, तोड़फोड़ कर शहरियों और पुलिस को हलाकान किया।
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जब हद पार हो गई तब जाकर पुलिस अफसरों की नींद टूटी।
ऐसा पहली बार नहीं है। इलाहाबाद के अलावा वाराणसी, अमेठी, ग्वालियर समेत जहां भी सेना की भर्ती रैली होती है वहां युवकों की भीड़ भारी उत्पात मचाती है। बार-बार भर्ती रैली में शहर के लोग फजीहत झेलते हैं लेकिन पुलिस-प्रशासन की ओर से पहले से पर्याप्त तैयारी नहीं की जाती है। पहले भी कई जगह भर्ती रैली के बवाल से वाकिफ पुलिस-प्रशासनिक अफसर यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी भारी संख्या में युवक आकर अराजकता फैलाएंगे। उनकी उदासीनता का खामियाजा हर बार शहरियों को झेलना पड़ता है। इस बार भी यही हुआ। जब हद पार हो गई तब पुलिस-पीएसी के साथ ही सेना के जवानों को भी कई जगह मुस्तैद किया गया।

मंगलवार को अभ्यर्थियों की ओर से किए गए बवाल के मद्देनजर सेना, रेलवे और रोडवेज के अधिकारियों के साथ बातचीत की जा रही है। भर्ती परीक्षाओं के समन्वय के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी, जिससे शहर में शांति व्यवस्था बनी रहे। न अराजकता की स्थिति बने और न ही शहरियों को किसी तरह की कोई दिक्कत हो।
संजय कुमार
डीएम, इलाहाबाद

भर्ती रैली के बारे में सेना के अफसरों के साथ मीटिंग में तय हुआ था कि एक रोज में छह से आठ जिलों के ही अभ्यर्थियों को बुलाया जाए ताकि ज्यादा भीड़ न हो और पुलिस भी अभ्यर्थियों को नियंत्रित रखसके। मगर पहले ही रोज 16 जिलों से अभ्यर्थी बुला लिए गए। अनुमान से ज्यादा भीड़ आ गई जिसके बारे में जिला पुलिस-प्रशासन को जानकारी नहीं थी। ऐसे में भीड़ को समय से काबू नहीं किया जा सका। सोमवार रात की घटना के बाद रेलवे स्टेशन, बस अड्डों समेत पानी टंकी चौराहा, पत्थर गिरजाघर, चौफटका के अतिरिक्त भर्ती रैली के आसपास अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई। पुलिस के साथ ही आरएएफ और पीएसी को भी मुस्तैद किया गया।
0जेके शाही
डीआईजी, इलाहाबाद

आखिर सेना की भर्ती में ही बवाल क्यों
0 अन्य कई भर्ती परीक्षाओं में शामिल हो चुके हैं 50 हजार से अधिक अभ्यर्थी
0 एसएससी की परीक्षा में 80 हजार से अधिक  अभ्यर्थी होते रहे हैं शामिल
0 लेखपाल, रेलवे, टीईटी समेत कई भर्तियों में एक लाख से अधिक ने दी है परीक्षा
0 हर परीक्षा से पहले जिला और पुलिस प्रशासन के अफसरों से होती है वार्ता
इलाहाबाद। सेना भर्ती के दौरान अभ्यर्थियों के तांडव ने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मंगलवार को ही नहीं, सेना की कई अन्य भर्तियों मेें भी शहरियों को अभ्यर्थियों के तांडव का शिकार होना पड़ा है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि अनुशासन के लिए जानी जाने वाली सेना की भर्ती में ही युवा आखिर क्यों अनियंत्रित हो रहे हैं। जबकि, इलाहाबाद में कई भर्ती परीक्षाओं में एक लाख से भी अधिक अभ्यर्थी जुट चुके हैं और पूरी परीक्षा शांति से निपट गई। गौर करने वाली बात यह भी है रेलवे और बस स्टैंड पर इन भर्तियों के हजारों अभ्यर्थियों का जमावड़ा होता है लेकिन इस तरह के बवाल की कोई घटना नहीं हुई। ऐसे में भर्ती को लेकर व्यवस्था के साथ सेना और जिला तथा पुलिस प्रशासन के बीच तालमेल को लेकर खामी की बात भी उठने लगी है।

जिला प्रशासन की ओर से हाल ही में आयोजित लेखपाल भर्ती परीक्षा में एक लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए। आलम यह रहा कि गांवों के स्कूलों में भी सेंटर बनाने पड़े। इस परीक्षा के बाद रेलवे स्टेशन पर परीक्षार्थियों का रेला उमड़ा। रेलवे की भर्तियों में भी एक लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। कुछ समय पहले अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में भी शहर में एक लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे और पूरे शहर में परीक्षार्थियों हुजूम उमड़ा था।

कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की कई भर्ती परीक्षाओं में 80 हजार से अधिक अभ्यर्थी शामिल हो चुके हैं। पिछले रविवार को ही संघ लोक सेवा आयोग की एनडीए और यूपीएसईई की परीक्षा में तकरीबन 40 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
प्रतियोगियों के गढ़ इलाहाबाद में इस तरह का नजारा विभिन्न संस्थाओं की भर्ती परीक्षाओं के दौरान ज्यादातर रविवार को देखने को मिलता है। ऐसे में भीड़ की वजह से शहरियों तथा रेलवे के यात्रियों को आवागमन को लेकर तो परेशानी उठानी पड़ती है लेकिन परीक्षार्थियों के अनियंत्रित होने की घटना नहीं हुई। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के एक अफसर का कहना है कि  हर बड़ी भर्ती परीक्षा से पहले जिला और पुलिस प्रशासन के साथ बैठक की जाती है। साथ ही रेलवे तथा रोडवेज के अफसरों को भी जानकारी दी जाती है। यही प्रक्रिया अन्य भर्ती संस्थाएं भी अपनाती हैं। ताकि परीक्षा में शुचिता के साथ युवाओं पर नजर रखने तथा भीड़ के अनुसार सुविधाएं सुनिश्चित की जा सके। सेना की भर्ती में एक ही जगह युवाओं का जमावड़ा होता है। इसलिए उन्हें नियंत्रित करने के लिए विशेष इंतजाम होने चाहिए।
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