जिला अदालत ने 13 साल पहले मारपीट और एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार सिंह-अष्टम ने दिया। लालापुर थाना क्षेत्र के छतहरा घुरेटा निवासी आरोपी राजधर धुरिया उर्फ बुल्ली, विद्याधर धुरिया, मुन्ना धुरिया उर्फ धनंजय और अतुल धुरिया उर्फ ननकऊ के खिलाफ एक मार्च 2012 को मारपीट, एससी/एसटी एक्ट समेत कई धाराओं में देवराज नट ने मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप था कि आरोपियों ने रंजिश के चलते वादी के बेटे के साथ मारपीट की और उसका पैर तोड़ दिया। विवेचना के बाद आरोप पत्र दाखिल हुआ। विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से तीन गवाह पेश किए गए, जिनमें वादी, कथित घायल और चिकित्सक शामिल थे। घायल ने अदालत में दिए बयान में कहा कि उसे किसने मारा, वह पहचान नहीं सका और आरोपियों ने उसके साथ न तो मारपीट की और न ही जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया।
वहीं, वादी देवराज ने भी जिरह के दौरान यह स्वीकार किया कि दोनों पक्षों के बीच करीब 20 से 22 साल पुरानी दुश्मनी चली आ रही है। कई पुराने मुकदमे भी पहले से चल चुके हैं। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि ऐसे में मात्र संदेह और रंजिश के आधार पर आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।