यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में संगम को स्थान दिलाने की अमर उजाला की मुहिम से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद भी जुड़ गया है। परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि संगम विश्व की दुर्लभ थाती है। इसे सूचीबद्ध कराने का प्रस्ताव महाकुंभ में 26 जनवरी को होने वाली धर्म संसद में भी लाएंगे।
रवींद्र पुरी ने कहा, संगम के महात्म्य का गुणगान वेद-पुराणों में है। संगम पर वेणीमाधव, सोमेश्वर, भरद्वाजेश्वर, नागवासुकि, अक्षयवट जैसे तीर्थों का मिलन जगत के लिए मंगलकारी है। पदम पुराण में कहा गया है कि त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहते हैं, 12वें वर्ष में कुंभ का और छठवें वर्ष में अर्धकुंभ का त्रिवेणी संगम पर विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समागम अद्भुत और अविस्मरणीय होता है। इसकी महिमा अपरंपार है।
महाकुंभ में 45 करोड़ से अधिक भक्तों के आने का अनुमान है। यह मेला सद्भाव, सौहार्द, सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। यह छुआछूत, जातीयता और सांप्रदायिकता से परे है। यह सहिष्णुता और मानवता की मिसाल है। इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया ही जाना चाहिए।
नगर देवता वेणी माधव के दरबार से भी आवाज बुलंद
नगर देवता भगवान वेणी माधव के दरबार में मंगलवार को सविधि पूजन-आरती के साथ संगम को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने का संकल्प लिया गया। मुहिम की सफलता के लिए प्रयागराज सेवा समिति संग आधा दर्जन से अधिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने मां गंगा और भगवान वेणी माधव का आशीष लिया। जनजुड़ाव का आह्वान भी किया गया।