कई शायरों ने नाम में इलाहाबादी जोड़कर बनाई पहचान
भैरव प्रसाद गुप्त, महादेवी, कमलेश्वर, गोविन्द मिश्र, नासिरा शर्मा, दूधनाथ सिंह, ममता कालिया जैसे अनगिनत रचनाकारों ने जगह-जगह ‘इलाहाबाद’ को लिखा है, रचाया-बसाया है। शायरों ने तो जमकर अपने नाम के आगे इलाहाबादी जोड़कर पहचान बनाई। अकबर इलाहाबादी के साथ अकेले राशिद इलाहाबादी और तेग इलाहाबादी ही थोड़े ही हैं। अकबर इलाहाबादी के समकालीन शायर हैरत इलाहाबादी या फिर ‘लज़्ज़त-ए-गम बढ़ा दीजिए , आप फिर मुस्कुरा दीजिए’ जैसी पंक्तियां रचकर अमर हो गए शायर राज इलाहाबादी भी इसमें हैं।
सच तो यह कि यह परंपरा आज भी जारी है। वैसे न जाने क्या तासीर है ‘इलाहाबाद’ नाम में कि हर कोई इससे जुड़ना चाहता है। इतिहास गवाह है कि एक समय था कि बॉलीवुड की कई फिल्में बिना इलाहाबाद का जिक्र किए पूरी ही नहीं होती थीं। राजनीति के कई फलक अपने में जगह-जगह ‘इलाहाबाद’ को दर्ज किए हुए हैं।