दिल्ली के रामजस कालेज के विवाद को लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी एबीवीपी और आइसा से जुड़े विद्यार्थी आमने-सामने आ गए हैं। एबीवीपी से जुडे़ छात्र-छात्राओं ने मंगलवार को परिसर में जुलूस निकाला तथा वामपंथ का पुतला दहन किया। वहीं आइसा ने चार मार्च को विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। वामपंथी छात्र संगठनों ने परिसर में लोकतंत्र की बहाली की मांग को लेकर फोरम का गठन कर भी आंदोलन शुरू किया है।
छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्रा की अगुवाई में एबीवीपी कार्यकर्ताआें ने परिसर में तिरंगा यात्रा निकाली। रोहित का कहना था कि विद्यार्थी देश विरोधी ताकतों को परिसर में घुसने नहीं देंगे। इनके समर्थन में महिला छात्रावास के सामने छात्राआें ने वामपंथ का पुतला दहन किया। उन्होंने वामपंथी विचारधारा के खिलाफ नारेबाजी भी की। तिरंगा यात्रा और पुतला दहन में हिमांशु पांडेय, आनंद सिंह, रिंकू पयासी, प्रियंका सिंह, अन्नू राजपूत, मंजूला सिंह अश्वनी आदि शामिल रहे।
वहीं आइसा ने चार मार्च को बड़े विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। इसके समर्थन में संगठन की ओर से पर्चे बांटे जा रहे हैं। इसमें आइसा पर लगे आरोपों का खंडन, एबीवीपी के छद्म राष्ट्रवाद आदि बिंदुओं को उजागर कर लोगों से समर्थन की अपील की गई है। आइसा के शक्ति रजवार का कहना है कि एबीवीपी के लोगों ने जेएनयू, दिल्ली समेत पूरे देश में माहौल बिगाड़ रखा है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी वे कोई कार्यक्रम नहीं होने दे रहे। इसका कड़ा प्रतिकार किया जाएगा। वामपंथी छात्र संगठनों की ओर से गठित फोरम फॉर कैंपस डेमोक्रेसी ने भी आइसा का समर्थन किया है। फोरम के अमित का कहना है कि राष्ट्रवाद के नाम पर पूरे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को आघात पहुंचाया जा रहा है। फोरम इस मुद्दे पर आइसा के साथ है। एबीवीपी की मनमानी के खिलाफ तथा परिसर में लोकतंत्र की बहाली के लिए ही फोरम का गठन किया गया है।