एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत जिले के मूंज शिल्पकारों को उन्नत डिजाइन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कौशल विकास मिशन ने पहले चरण में 100 शिल्पकारों का चयन किया है। 90 दिवसीय प्रशिक्षण मूंज उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने में मदद करेगा।
जिले में तीन हजार से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मूंज के उत्पाद बनाती हैं। इन उत्पादों को बाजार के अनुकूल बनाने के लिए यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है। कौशल विकास जिला प्रबंधक अभिषेक शुक्ला ने बताया कि ओडीओपी से जुड़े मूंज उत्पाद बनाने वाले हस्त शिल्पकारों के लिए 90 दिन की ट्रेनिंग शुरू की गई है।
उन्नत डिजाइन और बाजार की मांग
मूंज के उत्पादों की धार्मिक और पर्यावरणीय अनुकूलता के कारण बाजार में मांग बढ़ रही है। कौशल विकास मिशन की सहयोगी त्रिवेणी सोशल फाउंडेशन यह डिजाइन प्रशिक्षण दे रही है। फाउंडेशन के अध्यक्ष अमित सिंह ने बताया कि पहले चरण में 100 शिल्पकारों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिसमें अभी 50 का चयन हो चुका है। महेवा पूरब पट्टी की मानसी भारती ने कहा कि यह विस्तृत ट्रेनिंग उन्नत डिजाइन कौशल प्रदान करेगी।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समावेश महेवा की मूंज शिल्पकार नसीमा ने बताया कि ई-कॉमर्स कंपनियों से मिलने वाले ऑर्डर में अनुकूलित उत्पादों की मांग अधिक है। अमित सिंह ने कहा कि इस प्रशिक्षण मॉड्यूल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से लेकर सभी आधुनिक उपकरण शामिल हैं। इन्हें ट्रेनिंग के अंतिम हफ्तों में सिखाया जाएगा। यह पहल मूंज उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी और शिल्पकारों की कल्पना को नए पंख देगी।