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आगरा जामा मस्जिद : शाही ईदगाह कमेटी का पक्षकार बनने का हिंदू पक्ष ने किया विरोध, 12 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

Mon, 05 Aug 2024 09:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह (वीडियो काफ्रेंसिंग) व अधिवक्ता राधेश्याम यादव ने दलील दी कि शाही ईदगाह कमेटी का इस मामले से कोई सरोकार नहीं है। वह सिर्फ इसलिए पक्षकार बनना चाहते हैं कि मामले को लंबे समय तक कोर्ट में लंबित रखा जा सके। वहीं, हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल आपत्ति में त्रुटियां होने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
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जामा मस्जिद, आगरा - फोटो : istock
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को आगरा की जामा मस्जिद की सीढि़यों के एएसआई सर्वे की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान शाही ईदगाह कमेटी के पक्षकार बनने के लिए दाखिल किए गए आवेदन का हिंदू पक्ष ने विरोध किया। वहीं, एएसआई ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है। न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की कोर्ट मामले की सुनवाई कर रही है। अगली तिथि 12 अगस्त है।

अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह (वीडियो काफ्रेंसिंग) व अधिवक्ता राधेश्याम यादव ने दलील दी कि शाही ईदगाह कमेटी का इस मामले से कोई सरोकार नहीं है। वह सिर्फ इसलिए पक्षकार बनना चाहते हैं कि मामले को लंबे समय तक कोर्ट में लंबित रखा जा सके। वहीं, हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल आपत्ति में त्रुटियां होने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। कहा, कि उपयुक्त आवेदन शपथपत्र के साथ दाखिल करें। साथ ही एएसआई की ओर से जवाब न देने पर कोर्ट ने 12 अगस्त तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित शूट नंबर 10 की सुनवाई के लिए भी कोर्ट ने 12 अगस्त की तिथि निर्धारित की है। पूर्व में अभियोजन की अनुपस्थिति के चलते कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था।

आगरा के शाही मस्जिद के नीचे दबे हैं विग्रह

अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह का दावा है कि 1670 में औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर का विध्वंस किया था। इस दौरान गर्भगृह के विग्रह को खंडित कर हिंदू धर्म की आस्था को ठेस पहुंचाने के लिए जामा मस्जिद आगरा की सीढि़यों में लगा दिया गया था। उन्होंने याचिका दााखिल कर जांच के लिए एडवोकेट कमिश्नरी नियुक्त करने व एएसआई जांच कराने की मांग की है।

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