इलाहाबाद ब्यूरो। नेपाल, चीन व अफगानिस्तान में एक ही दिन में एक साथ आए तीन भूकंपों का असर इन देशों पर जहां विनाशकारी रहा, वहीं भूकंप के झटकों से दहशतजदा शहरी बुधवार को भी तनाव में रहे। भूकंप के दोबारा आने की आशंकाओं के बीच तमाम ऐसे शहरी रहे जो बच्चों, परिजनों संग सुबह से ही घर से बाहर निकल लिए। ऐसे शहरियों ने पूरा दिन पार्कों या फिर सड़कों पर तफरीक करके बिताया। देर शाम ढलने के बाद लोग घरों को लौटे।
भूकंप की चर्चाओं का दौर सरकारी कार्यालयों में भी रहा। डीआरएम आफिस, बीएसएनएल आफिस, कलेक्ट्रेट, विकास भवन, सीएमओ आफिस, एलआईसी आफिस, बिजली विभाग के तमाम कार्यालयों में अधिकारियों, कर्मचारियों के बीच दिन भर चर्चाओं का दौर जारी रहा। सरकारी कामकाज छोड़ भूकंप के वैज्ञानिक पहलुओं से अंजाम कई अधिकारी, कर्मचारी अपने अंदाज में तमाम आशंकाएं व्यक्त करते नजर आए। किसी ने इसे प्रकृति का प्रकोप तो किसी ने धर्म से जोड़ते हुए ईश्वर की नाराजगी बतायी। समाचार पत्रों में भूकंप से छपी खबरों के आधार पर अधिकारी, कर्मचारी तरह तरह की आशंकाएं व्यक्त करते नजर आए।
इन अफवाहों के बीच कि भूकंप के ज्यादातर झटके 12 दोपहर के आसपास आते हैं जैसे ही 12 बजे उसी समय कई अधिकारी, कर्मचारी बाहर निकल लिए। इस दौरान कार्यालयों में शिकायतें लेकर पहुंचे लोगों को भी अधिकारियों, कर्मचारियों का इंतजार करना पड़ा। आखिरकार जब डेढ़ दो घंटे बाद अधिकारी, कर्मचारी लौटे तो लोगों की समस्याओं का निराकरण किया गया।
भूकंप के झटकों का सबसे अधिक होमगार्ड्स आफिस, आपूर्ति विभाग कार्यालय, सिविल डिफेंस, अपर निदेशक स्वास्थ्य जैसे सरकारी कार्यालयों में तैनात अधिकारियों, कर्मचारियों मेें रहा। शहर में तमाम ऐसे सरकारी कार्यालय है जो सौ साल पुराने भवनों में संचालित हैं। ये सभी सरकारी भवन इतने जर्जर हो चुके हैं तो भूकंप और तेज झटका लगा तो इनके धराशायी होने में देर नहीं लगेगी। स्थिति यह रही कि इन कार्यालयों में तैनात अधिकारी, कर्मचारी दफ्तरों में बैठने को तैयार नही है। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि भवन बदलने को लेकर कई बार आला विभागीय अधिकरियों से लिखापढ़ी की गई लेकिन कोई कार्रवाई नही हो रही है। लगता है कि एक दिन भूकंप के चलते भवन जमींदोज हो जाएंगे और जानमाल का भारी नुकसान हो जाएगा।