इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह को शून्य घोषित करने को लेकर दायर मुकदमे की सुनवाई के दौरान यदि युवक की मौत हो जाती है तो उसके माता-पिता को मुकदमे की कार्यवाही को आगे बढ़ाने का अधिकार है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला व न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी ने शताक्षी की अपील को खारिज करते हुए यह आदेश दिया है।
दीपक महेंद्र पांडे ने शताक्षी के साथ हुए विवाह को शून्य घोषित करने के लिए अपर प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, कानपुर नगर में वाद दायर किया था। उन्होंने कहा कि शताक्षी पहले से ही विवाहित थी। इसके बाद भी स्वयं को अविवाहित बताकर विवाह किया। यह धोखाधड़ी है। इस आधार पर विवाह को शून्य करने की मांग की। बेटे की मृत्यु के बाद माता-पिता ने आवेदन दायर कर याचिका को आगे बढ़ाने की मांग की। इस पर फैमिली कोर्ट ने 10 जनवरी 2024 को आदेश जारी कर अनुमति प्रदान की। इसके विरोध में हाईकोर्ट में अपील की।
महिला के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि मुकदमे के लंबित रहने के दौरान पति या पत्नी में से किसी एक की मृत्यु के बाद विवाद जारी नहीं रह सकता है। 24 फरवरी 2023 को पति की मृत्यु के बाद याचिका समाप्त हो जाएगी। वहीं, प्रतिवादी वकील ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में कोई गलती नहीं है। क्योंकि, यदि विवाह को शून्य घोषित किया जाता है तो संपत्ति के अधिकार निश्चित रूप से प्रभावित होंगे। इसलिए मुकदमे की कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए माता-पिता को अनुमति देना उचित है। कोर्ट ने तथ्यों का अवलोकन व दलीलों को सुनने के बाद कहा कि पति की मृत्यु के बाद उसके माता-पिता को मुकदमे की कार्यवाही को आगे बढ़ाने का कानूनी अधिकार है।