प्रदेश के कई जिलों में लगातार बारिश और बाढ़ के बाद मानसून में लंपी संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए पशु मेलों के आयोजन स्थगित कर दिए गए हैं और पशु परिवहन पर भी पाबंदी लगाई गई है। वायरस से बचाव के लिए शासन ने पशु टीकाकरण का विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
जिले में 2020 की पशुगणना में गोवंश और महिष वंश की संख्या 13 लाख 77 थी, जो 2021 में 8.90 लाख हो गई है। झांसी जिले में कुछ गोवंश में लंपी के लक्षण मिलने और एक की मृत्यु के बाद रक्त जांच के लिए भेजा गया है। प्रयागराज के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ एसएन यादव का कहना है कि जिले में अभी लंपी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभाग सतर्क है। जिले में सघन टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है और 48 हजार लंपी के टीके मंगाकर टीकाकरण जारी है।
सीमावर्ती क्षेत्रों और गोशालाओं में टीकाकरण
जनपद की सीमा मध्य प्रदेश से मिलती है, इसलिए इन सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता जारी है। विभाग द्वारा सर्वेक्षण कराया जा रहा है। डॉ एसएन यादव ने बताया कि कोरांव का पूरा क्षेत्र संवेदनशील है, जहां सभी गोवंश का सर्वेक्षण और रिंग टीकाकरण हो रहा है। जिले की गोशालाओं में 23 हजार से अधिक संरक्षित गोवंश का टीकाकरण किया जा रहा है। इसके लिए पशुपालन विभाग की 37 टीमें लगाई गई हैं। मोबाइल वेटनरी वैन भी गांव-गांव जा रही हैं।
पशुपालकों का अनुभव और अन्य टीकाकरण
रीवा जिले की सीमा से सटे मेजा के बड्डीहा गांव के पशुपालक रोशन लाल ने अपनी दो गायों का टीका लगवाया है। जोर गांव के सुशील सिंह ने बताया कि पशुपालन विभाग की मोबाइल वेटनरी वैन के शिविर से उन्होंने गांव की सभी गायों का टीकाकरण कराया है। मानसून और बारिश के बाद विभिन्न संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए पशुधन ने जुलाई से ही टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया था। गलघोंटू या एचएस सेप्टीसीमिया के लिए 7.36 लाख पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) के लिए 9.2 लाख टीके आए थे, जिनमें से 5.38 लाख लगाए जा चुके हैं।