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ढांचा गिरने के बाद आतंकियों के निशाने पर आ गए थे सिंहल

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After the collapse of the structure, Sinhala came under the target of terrorists - फोटो : CITY DESK
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प्रयागराज। अयोध्या में विवादित ढांचा गिरने के बाद विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अशोक सिंहल आतंकियों के निशाने पर आ गए थे। उनकी सुरक्षा तब विहिप पदाधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती थी। बाद में कुछ पदाधिकारियों की जिद की वजह से सिंहल जब भी बाहर निकलते तो वह एक पगड़ी जरूर पहनते थे। यह पगड़ी साधारण पगड़ी नहीं, बल्कि बुलेट प्रूफ पगड़ी थी। हालांकि, बुुलेट प्रूफ जैकेट पहनने से सिंहल जरूर परहेज करते थे।
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दरअसल, प्रयागराज अयोध्या आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा था। अशोक सिंहल की कर्मभूमि होने की वजह से प्रयागराज में ही आंदोलन से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते थे। विहिप के प्रांत महामंत्री लालमणि तिवारी बताते हैं कि तब ढांचा गिरने के बाद सिंहल आतंकियों के निशाने पर भी आ गए थे। हालात ऐसे हो गए थे कि कई बार रेलवे में उनका रिजर्वेशन भी नाम बदलकर करवाना पड़ता था। लालमणि के मुताबिक विवादित ढांचा गिरने के बाद विहिप के तमाम कार्यालय सील कर दिए गए थे।
बताया कि कीडगंज कार्यालय सील करने के साथ उन्हें और वर्तमान पार्षद रमेश मिश्र को गिरफ्तार कर लिया गया था। तब कार्यालय सील होने के विरोध में नैनी जेल में आमरण अनशन किया गया। अशोक सिंहल तक यह बात पहुंची तो वह भी चिंतित हुए। लालमणि ने बताया कि तब चार दिन बाद हालत खराब होती देख नैनी जेल में उनकी नाक में नली डालकर दूध दिया गया। बाद में तत्कालीन डीएम सुभाष कुमार के आश्वासन पर आमरण अनशन तोड़ा गया। इसके बाद विहिप कार्यालय पुलिस ने खुलवाया। इसके पूर्व कारसेवा अभियान शुरू होने के दौरान सिंहल ने प्रयागराज में सभी कारसेवकों का तिलक लगाकर अभिवादन किया था।
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