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विरोध के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश पर लगाई रोक

Sat, 15 Feb 2020 01:06 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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court - फोटो : court
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अधिवक्ता द्वारा कोर्ट में बीमारी की अर्जी देकर विवाह समारोह में जाने के मामले में वकीलों के विरोध और अनुरोध के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रकरण को मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित कर दिया है। इससे पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ता त्रिपाठी बी जी भाई  के खिलाफ  जारी आदेश में उनसे स्पष्टीकरण मांगा था कि क्यों उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया।
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त्रिपाठी बीजी भाई 11 फरवरी को शादी समारोह में शामिल होने गए थे। इस दौरान उन्होंने कोर्ट में लंबित अपने मुकदमे में बीमार होने की अर्जी लगाकर सुनवाई टालने के मांग की थी। जबकि उसी दिन एक अन्य मुकदमे में एक सहयोगी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि त्रिपाठी बीजी भाई सिद्धार्थनगर में एक विवाह समारोह में शामिल होने गए हैं। उन्होंने टेलीफोन पर बीजी भाई से हुई बातचीत का हवाला दिया।

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल के इस आदेश  का बार में काफी विरोध हुआ। सुबह 10 बजे से पहले वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा, अनिल तिवारी, अशोक सिंह, प्रभाशंकर मिश्र सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता न्यायमूर्ति अग्रवाल की अदालत में पहुंच गए और उनके समक्ष कानूनी तथा व्यावहारिक पक्ष रखते हुए आदेश वापस लेने की प्रार्थना की। इस पर कोर्ट ने स्वत: कार्रवाई की और आदेश पर रोक लगा दी।
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वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा व अधिवक्ता अनिल तिवारी ने कोर्ट से कहा कि बार काउंसिल स्वयं मसले का हल निकालने में जुटी है। कोर्ट ने अपने आदेश पर रोक लगाते हुए मुख्य न्यायाधीश से  अधिवक्ताओं की आपत्ति की वैधता पर निर्णय लेने का अनुरोध किया है।

फोटो और शपथपत्र एक साथ के आदेश पर भी रोक
प्रयागराज। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने अधिवक्ता बीजी भाई के मामले के अलावा एक अन्य आदेश देकर फोटो एफिडेविट और नोटरी एफिडेविट एक ही दिन करने का आदेश दिया था। अमूमन हाईकोर्ट में वादकारी का फोटो एफिडेविट बनवाने के कई दिन बाद नोटरी एफिडेेविट कराया जाता है। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को बंद कर दोनों कार्य एक साथ करने का आदेश दिया था। वकीलों को इस आदेश से भी व्यवहारिक कठिनाई थी इसलिए कोर्ट ने इस आदेश को भी स्थगित करते हुए मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित कर दिया है।
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