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एफआईआर के बाद तुरंत पॉक्सो पीड़िता का मेडिकल, उम्र निर्धारण की जांच कराएं : हाईकोर्ट

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पॉक्सो पीड़िता की मेडिकल व उम्र निर्धारित करने वाली जांच तुरंत कराई जाए। पीड़िता की उम्र निर्धारित करने वाली मेडिकल रिपोर्ट दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164-ए के तहत बिना देरी के न्यायालय में प्रस्तुत की जानी चाहिए। साथ ही कहा कि महानिदेशक (स्वास्थ्य), उत्तर प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करेंगे कि मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टर विधिवत प्रशिक्षित हो। इस आदेश की एक प्रति डीजीपी को अनुपालन के लिए व महानिदेशक (स्वास्थ्य), उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ को सूचित करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति अजय भनोट की कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम परितोष कुमार मालवीय ने सरकार का अपना पक्ष रखा।
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मामले में आवेदक अमन उर्फ वंश पर पॉक्सो एक्ट सहित दुष्कर्म व अन्य मामलों में पुलिस स्टेशन-शालीमार गार्डन, जिला-गाजियाबाद में मुकदमा दर्ज है। वह पांच दिसंबर 2023 से जेल में है। उसकी जमानत अर्जी ट्रायल कोर्ट ने 21 दिसंबर 2023 को खारिज कर दी। वकील ने कहा कि पीड़िता को गलत तरीके से एफआईआर में नाबालिग के रूप में दिखाया गया था, ताकि आवेदक को पॉक्सो अधिनियम में फंसाया जा सके। कहा कि विभिन्न अभियोजन दस्तावेजों में दर्ज पीड़िता की उम्र में विरोधाभास है। आवेदक के पक्ष में अधिवक्ता ने कई तर्क प्रस्तुत करे।
इस पर कोर्ट ने आवेदक की जमानत अर्जी सशर्त स्वीकार कर ली। साथ ही कहा कि पॉक्सो अधिनियम के तहत बड़ी संख्या में जमानत आवेदनों में पीड़ितों की उम्र से संबंधित मुद्दे सामने आते हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से बताई गई पीड़ित की उम्र अक्सर नवीनतम चिकित्सा जांच में भिन्न होती है। कई बार उपलब्ध कराए गए आयु संबंधी दस्तावेजों में कई विरोधाभास होते हैं। झूठे आरोप लगाने व पॉक्सो अधिनियम के दुरुपयोग के कई मामले भी देखे गए हैं। इस प्रक्रिया में कम उम्र के भागे जोड़ों को अपराधी बना दिया जाता है। ऐसे में कोर्ट ने कहा कि पॉक्सों के मामले में एफआईआर दर्ज होते ही तुरंत मेडिकल के साथ ही आयु निर्धारण की जांच कराई जाए।
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