prayagraj news : डेनमार्क के डॉक्टर दंपती ने बच्चे को लिया गोद।
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खुल्दाबाद स्थित राजकीय शिशु गृह में दोनों पैर से दिव्यांग आठ वर्ष के बच्चे को डेनमार्क से आए फरिश्ते अपने घर ले गए। डॉक्टर दंपती ने बच्चे को गोद ले लिया है। गोद लेने की प्रक्रिया के दौरान शिशु गृह का माहौल काफी भावुक रहा और सभी की आंखें नम थीं। लेकिन सभी के चेहरे पर संतोष के भाव थे कि बच्चे को अब ममता की छांव मिलेगी।
मां ने जन्म देने के बाद ही मरने के लिए फेंक दिया था। मासूम की तकलीफें यहीं खत्म नहीं होती बल्कि शुरू होती है। मात्र छह दिन के इस नवजात के ऊपर से ट्रेन गुजर जाती है, जिसमें उसके दोनों पैर कट गए। हादसे में हाथ की उंगलियां भी कट गईं, लेकिन सांसों ने साथ नहीं छोड़ा। सांसें टूटतीं भी कैसे, उसके जीवन में मां-पिता के दुलार के साथ सुखद पल जो लिखे थे। आठ साल डेनमार्क के डॉक्टर दंपती ने दिव्यांग बच्चे को गोद लेने का फैसला लिया। उन्होंने इसके लिए ऑथराइज्ड फॉरेन एडाप्शन एजेंसी (आफा) में आवेदन कर रखा था। उनकी 10 वर्षों की तलाश यहां आकर पूरी हुई। आफा की लंबी प्रक्रिया के बाद बृहस्पतिवार को बच्चे को मां के सुपुर्द किया गया। इस दौरान महिला की मां भी मौजूद रहीं। हालांकि, पति नहीं आ पाए थे।
शिशु गृह के अधीक्षक हरीश श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चा छह दिन का था तब उसे चाइल्ड लाइन बलिया से लाया गया था। एक हादसे में उसके दोनों पैर घुटने से कट गए थे। हाथ की अंगुलियां भी नहीं थीं। काफी इलाज और ऑपरेशन के बाद एक हाथ में अंगुलियां आ गईं लेकिन दूसरा हाथ वैसे ही है। उन्होंने बताया कि सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बच्चे को महिला के सुपुर्द किया गया। इस दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज मिश्रा भी मौजूद रहे।
14 महीने में 40 बच्चों को मिले माता-पिता
14 महीने में शिशु गृह के 40 बच्चों को माता-पिता मिले हैं। 2020 में शिशु गृह के कुल 35 बच्चों को गोद लिया गया था। इनमें से सात बच्चों को विदेशी दंपतियों ने गोद लिया। वहीं जनवरी में तीन तथा फरवरी में अब तक दो बच्चों को गोद लिया जा चुका है। इनमें से एक बच्ची को स्पेन के दंपती ने गोद लिया है।