संगम की त्रिवेणी में स्नान और दान का विशेष महत्व
उन्होंने बताया कि इस संयोग में संगम की त्रिवेणी में स्नान और दान का विशेष महत्व है और इससे जनमानस का भी कल्याण होगा। इस बार श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में बढ़ सकती है इसलिए साधु, संतों के शिविरों में भी लोगों के रहने और भोजन की खास तैयारी की जा रही है। वहीं योगी सरकार भी महाकुंभ के बाद आयोजित होने जा रहे इस माघ मेले को मिनी कुंभ के तौर पर आयोजित करने की तैयारियों में जुटी है। सतुआ बाबा ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री दो बार माघ मेले की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की बैठकें कर चुके हैं। अमावस्या पर सभी अखाड़ों के महामंडलेश्वर , द्वारचार्य महावीर रोड से प्रस्थान कर पांटून पुल नंबर दो होते स्नान करनें जाएंगे।
सनातन में उत्तम रंग है भगवा : स्वामी ब्रह्माश्रम महराज
इस बार माघ मेले का पूरी तरह से भगवाकरण भी किया जा रहा है। माघ मेले में बनाए जा रहे पांटून ब्रिजों को भगवा रंग में रंगा जा रहा है जिसको लेकर साधु, संत भी उत्साहित हैं। अखिल भारतीय दंडी संयासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महराज ने बताया कि भगवा सिर्फ सनातन का ही नहीं बल्कि भगवान भास्कर का उदयित रंग भी है। इसे सनातन में उत्तम रंग माना गया है। उन्होंने कहा कि जब माघ मेले में सूर्य का योग बन रहा है तो प्रशासन ने भी पांटून ब्रिजों को भगवा रंग का करने का जो फैसला लिया है यह सर्वोत्तम है। उन्होंने साधु, संतों से अपील की है कि साधु, संत भी इस मेले में अपने शिविरों की बाउंड्री को भगवा रंग से सजाएंगे।