30 से ज्यादा कॉलेजों व विश्वविद्यालयों से फिर होगा सत्यापन
30 से ज्यादा कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से डिग्री और अंकपत्रों का सत्यापन कराया जा सकता है। सत्यापन में यह देखा जाएगा कि संबंधित अधिवक्ताओं के नाम से वास्तव में उस संस्थान में दाखिला हुआ था या नहीं। मामले में 100 से अधिक अधिवक्ताओं पर एफआईआर होने की संभावना है।
संगठित गिरोह की सामने आ सकती है भूमिका
जांच में सामने आया है कि कुछ अधिवक्ताओं ने बार कौंसिल में पंजीकरण और सीओपी के लिए जो शैक्षिक दस्तावेज लगाए, उनमें सिर्फ स्नातक स्तर की डिग्री ही संदिग्ध नहीं मिली, बल्कि 10वीं और 12वीं के प्रमाणपत्र और अंकपत्र को लेकर भी सवाल उठे हैं। संबंधित दस्तावेज का सत्यापन कराने पर रिकॉर्ड में उनका मिलान नहीं हो सका। बार कौंसिल अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि अधिवक्ताओं ने अलग-अलग स्तर की फर्जी शैक्षिक डिग्रियां और अंकपत्र कहां से हासिल किए। इसमें किसी संगठित गिरोह की भूमिका सामने आ सकती है।