अधिवक्ता कल्याण की योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाले जाने से नाराज वकीलों की ओर से की गई आंदोलन की घोषणा का पहला चरण सोमवार से आरंभ होगा। इसके तहत बार कौंसिल के आह्वान पर अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। साथ ही जिला स्तर पर संगठन के अध्यक्ष और महामंत्री जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे। विभिन्न चरणों से होते हुए 15 अप्रैल को विधानसभा का घेराव किए जाने की भी तैयारी है।
बार कौंसिल अध्यक्ष हरिशंकर सिंह के मुताबिक प्रयागराज में 22 फरवरी को प्रदेशस्तरीय सम्मेलन में सभी जिलों के अधिवक्ता संगठनों के अतिरिक्त तहसीलों, अधिकरणों आदि के संघ प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया था कि चैंबर निर्माण, मृतक अधिवक्ताओं के आश्रितों को आर्थिक सहायता, पेंशन और स्टाइपेंड जैसी योजनाओं को सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
न्यासी समिति को दी जाने वाली 40 करोड़ रुपये वार्षिक की आर्थिक सहायता भी कई वर्षों से बंद है। मृतक अधिवक्ताओं के पूरे प्रदेश में तकरीबन 500 मामले लंबित हैं। अधिवक्ताओं को 60 वर्ष की आयु में मृत्यु पर आर्थिक सहायता का प्रावधान था, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 70 वर्ष कर दिया है। न्यासी समिति को प्रतिवर्ष 80 करोड़ रुपये सरकार से न मिलने पर अधिवक्ता कल्याण की योजनाएं फेल होने की कगार पर हैं। इसी के साथ बार कौंसिल की ओर से जारी परिचयपत्र और सीओपी (सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस) को ही परिचयपत्र के रूप में मान्यता दिए जाने से अधिवक्ता नाराज हैं।
आंदोलन के अन्य चरण
016 मार्च-प्रदेश भर के अधिवक्ता (आयकर, जीएसटी, रेवेन्यू और कैट सहित) हाथ में लाल पट्टी बांधकर विरोध करते हुए न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
0 23 मार्च- सभी जिला, तहसील मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
0 30 मार्च - सभी जिला और तहसील मुख्यालयों पर न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए प्रदेश सरकार का पुतला जलाएंगे।
0 15 अप्रैल- पूरे ड्रेस में विधानसभा का घेराव करेंगे अधिवक्ता