इलाहाबाद उच्च न्यायालय और इसकी लखनऊ खंडपीठ में वकालत करने के लिए एडवोकेट रोल में नाम होने की अर्हता को चुनौती दी गई है। सुप्रीमकोर्ट के वकील दिलशाद अंसारी ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी थी मगर हाईकोर्ट में वकीलों की हड़ताल के चलते मामले में 13 जनवरी की तिथि नियत की गई है। याचिका में हाईकोर्ट रूल्स की नियमावली तीन और तीन ए को चुनौती दी गई है।
याची का कहना है कि एडवोकेट एक्ट की धारा 30 वर्ष 2011 में प्रभावी हो गई है। इसके मुताबिक बार काउंसिल में पंजीकृत अधिवक्ता देश की किसी भी अदालत में वकालत कर सकता है इस लिहाज से हाईकोर्ट का मौजूदा प्रावधान अल्ट्रा वायरस हो गया है। याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट और बार काउंसिल को पक्षकार बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक न्यायिक आदेश के द्वारा दो वर्ष पूर्व एडवोकेट रोल अनिवार्य कर दिया गया है। इससे अब हाईकोर्ट में वही अधिवक्ता प्रैक्टिस कर सकते हैं जो रोल में शामिल हैं। ऐसा वकालत में अपराधी तत्वों और आवंछित लोगों का प्रवेश रोकने की नीयत से किया गया है।