प्रदेश में बीडीओ के 370 और एडीओ पंचायत के 860 पद खाली हैं। इसके अलावा जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) के भी कुछ पद खाली हैं। वहीं, अधिशासी अधिकारी के पद भी बड़ी संख्या में रिक्त पड़े हैं। इन सभी पदों पर भर्तियां उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) करता है लेकिन आयोग को अब तक कार्मिक विभाग की ओर से इन पदों का अधियाचन नहीं मिला है तो रिक्त पदों पर भर्तियां ठप पड़ी हुई हैं। प्रतियोगियों का आरोप है कि इनमें से तमाम पदों पर आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्तियां कर काम कराया जा रहा है और इसकी आड़ में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। प्रतियोगियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर मांग की है कि रिक्त पदों का अधियाचन आयोग को शीघ्र भेजा जाए ताकि बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिल सके।
बीडीओ, अधिशासी अधिकारी और डीपीआरओ पर चयन पीसीएस परीक्षा के तहत होता है। पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 का आयोजन हो चुका है लेकिन अब तक परिणाम जारी नहीं किया गया है। अगर कार्मिक विभाग बीडीओ, अधिशासी अधिकारी डीपीआरओ के रिक्त पदों का अधियाचन पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले आयोग को भेज देता है तो इन पदों को पीसीएस-2017 में शामिल कर लिया जाएगा। अगर कार्मिक विभाग प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद अधियाचन भेजता है तो इन पदों पर भर्ती के लिए प्रतियोगियों को पीसीएस परीक्षा-2018 का इंतजार करना होगा। इसके अलावा प्रदेश में एडीओ पंचायत के भी 860 पद खाली हैं। इन पदों पर लोअर परीक्षा के तहत भर्तियां की जाती हैं।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय की ओर से मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि इन पदों पर भी आउटसोर्सिंग के जरिये भर्तियां की जा रही हैं और इसमें जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। ज्ञापन में कहा गया है कि यही हाल सपा सरकार में था। पंचायती राज विभाग के उच्च पदों पर बैठे जिन अफसरों ने गड़बड़ियां की थीं, वर्तमान में भी कमान उन्हीं अफसरों के हाथ में है। मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि कार्मिक विभाग एडीओ पंचायत के रिक्त पदों का अधियाचन तत्काल आयोग को भेजे ताकि इन पदों पर नियमित भर्तियां की जा सकें और बेरोजगार युवाओं को राहत मिल सके।