सवाल : इस पहचान और संगीत के क्षेत्र में मिले अवसरों को आप किस तरह देखते हैं?
मैं यही चाहता हूं कि हनुमानजी महाराज सभी भाई-बहनों पर अपनी कृपा बनाए रखें। हमारे तमाम गायक, म्यूजिक डायरेक्टर और दूसरे क्षेत्रों में काम करने वाले कलाकार लगातार मेहनत करते रहें। मेरा मानना है कि करने वालों की कभी हार नहीं होती। इसलिए अपना काम करते रहना चाहिए। एक न एक दिन हनुमान जी महाराज जरूर कृपा करते हैं।
सवाल : संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा रखने वाले दूसरे दिव्यांग कलाकारों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
मैं उनसे यही कहूंगा कि सबसे पहले अपनी ताकत को पहचानें। हनुमानजी को भी जामवंतजी ने उनकी शक्तियों का एहसास कराया था। जब उन्हें अपनी शक्ति का ज्ञान हुआ तो उन्होंने समुद्र पार कर लंका पहुंचने का साहस दिखाया। इसी तरह हर व्यक्ति के अंदर कोई न कोई खास क्षमता होती है। जरूरत है उसे पहचानने और जगाने की। किसी को भी खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए। दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, अपनी ताकत पहचानने का जरिया बनाएं।
सवाल : सफलता पाने के लिए आपके अनुसार सबसे जरूरी चीज क्या है?
किसी भी काम को पूरे तन-मन-धन से करना चाहिए। एक कहावत है- ‘करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान। रसरी आवत जात ते, सिल पर परत निसान।’ लगातार अभ्यास से कठिन काम भी आसान हो जाता है। मैंने अपने जीवन में यही सीखा है कि कभी हार नहीं माननी चाहिए। मेहनत करते रहेंगे तो एक न एक दिन उसका फल जरूर मिलेगा।