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गायक सुनील लोधी बोले : दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, अपनी ताकत पहचानने का जरिया बनाएं

Mon, 02 Nov 2026 04:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

फिल्म ‘हनुमान अंश’ के चर्चित भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे, हनुमान सागर में नैया डाल दी’ को अपनी आवाज देने वाले दृष्टिबाधित बुंदेली लोकगायक सुनील लोधी उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में प्रस्तुति देने पहुंचे।
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सुनील लोधी, गायक। - फोटो : अमर उजाला।
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फिल्म ‘हनुमान अंश’ के चर्चित भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे, हनुमान सागर में नैया डाल दी’ को अपनी आवाज देने वाले दृष्टिबाधित बुंदेली लोकगायक सुनील लोधी उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में प्रस्तुति देने पहुंचे। इस दौरान अमर उजाला के लिए संवाद न्यूज एजेंसी से खास बातचीत में उन्होंने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो के जरिये उनका हुनर म्यूजिक डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी तक पहुंचा और उन्हें उनके साथ भजन रिकॉर्ड करने का मौका मिला। सुनील का मानना है कि हर व्यक्ति के भीतर कोई न कोई विशेष क्षमता होती है। जरूरत है उसे पहचानने और लगातार मेहनत करने की।

सवाल : संगीत के क्षेत्र में आपकी शुरुआत कैसे हुई?

संगीत के प्रति मेरा लगाव बहुत गहरा रहा है। मैं जब हारमोनियम लेकर बैठ जाता था तो धुन पूरी किए बिना उठता नहीं था। मम्मी-पापा बार-बार आवाज लगाते थे कि खाना खा लो लेकिन मेरा ध्यान संगीत में ही लगा रहता था। कई बार सुबह से दोपहर चार बजे तक खाना नहीं खाया, क्योंकि जब तक गाना ठीक से बजा नहीं लेता था, तब तक उठता नहीं था। संगीत के प्रति यही जुनून मेरे सफर की ताकत बना।

सवाल : म्यूजिक डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी तक आपका हुनर कैसे पहुंचा?

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सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो डाला था। वह वीडियो म्यूजिक डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी जी तक पहुंचा। उन्होंने वीडियो पर कमेंट किया कि मुझे आपसे मिलना है। इसके बाद रात करीब 11:30 बजे उनसे मिलने जाते थे। दो-चार भजन सुनाते और सुबह एक भजन रिकॉर्ड करने का मौका मिलता था। दोपहर 12 बजे स्टूडियो पहुंचते, 12:30 बजे रिकॉर्डिंग शुरू होती और करीब एक बजे तक काम पूरा हो जाता था।

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सवाल : इस पहचान और संगीत के क्षेत्र में मिले अवसरों को आप किस तरह देखते हैं?

मैं यही चाहता हूं कि हनुमानजी महाराज सभी भाई-बहनों पर अपनी कृपा बनाए रखें। हमारे तमाम गायक, म्यूजिक डायरेक्टर और दूसरे क्षेत्रों में काम करने वाले कलाकार लगातार मेहनत करते रहें। मेरा मानना है कि करने वालों की कभी हार नहीं होती। इसलिए अपना काम करते रहना चाहिए। एक न एक दिन हनुमान जी महाराज जरूर कृपा करते हैं।

सवाल : संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा रखने वाले दूसरे दिव्यांग कलाकारों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

मैं उनसे यही कहूंगा कि सबसे पहले अपनी ताकत को पहचानें। हनुमानजी को भी जामवंतजी ने उनकी शक्तियों का एहसास कराया था। जब उन्हें अपनी शक्ति का ज्ञान हुआ तो उन्होंने समुद्र पार कर लंका पहुंचने का साहस दिखाया। इसी तरह हर व्यक्ति के अंदर कोई न कोई खास क्षमता होती है। जरूरत है उसे पहचानने और जगाने की। किसी को भी खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए। दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, अपनी ताकत पहचानने का जरिया बनाएं।

सवाल : सफलता पाने के लिए आपके अनुसार सबसे जरूरी चीज क्या है?

किसी भी काम को पूरे तन-मन-धन से करना चाहिए। एक कहावत है- ‘करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान। रसरी आवत जात ते, सिल पर परत निसान।’ लगातार अभ्यास से कठिन काम भी आसान हो जाता है। मैंने अपने जीवन में यही सीखा है कि कभी हार नहीं माननी चाहिए। मेहनत करते रहेंगे तो एक न एक दिन उसका फल जरूर मिलेगा।

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